नयी दिल्लीः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कांग्रेस कर रही है। इस फैसले पर इंडिया गठबंधन की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस का रुख लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया। मंगलवार को अभिषेक ने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने में तृणमूल को कोई आपत्ति या असुविधा नहीं है। हालांकि, उससे पहले तृणमूल पत्र लिखकर स्पीकर का रुख जानना चाहती है। साथ ही अभिषेक ने यह भी कहा कि स्पीकर ने विपक्षी नेताओं के साथ जो बैठक बुलाई है, उसमें वह उपस्थित रहेंगे।
कांग्रेस ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ सत्तारूढ़ दल के प्रति पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। मुख्य रूप से चार कारणों को सामने रखकर यह प्रस्ताव लाया जा रहा है। इनमें विपक्ष के नेता को संसद में बोलने का मौका न देना और विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित करना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा, “तृणमूल के सभी सांसद हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन हमारा कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले इंडिया गठबंधन की सभी सहयोगी पार्टियां मिलकर लोकसभा अध्यक्ष को एक संयुक्त पत्र दें। जिन चार मुद्दों की बात की जा रही है, उन्हें उठाकर पत्र दिया जाए। 2–3 दिन का समय दिया जाए। अगर स्पीकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते या कोई कदम नहीं उठाते हैं तो उसके अगले ही दिन नो-कॉन्फिडेंस मूव किया जाए।”
साथ ही अभिषेक का आरोप है कि केंद्र सरकार ही संसद का सत्र चलाना नहीं चाहती। इसी कारण लंबे समय तक कार्यवाही स्थगित रखी जा रही है। सोमवार दोपहर 2 बजे से मंगलवार सुबह 11 बजे तक सदन स्थगित रखा गया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को भी सत्र शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
अभिषेक ने सवाल उठाया, “हम चाहते हैं कि संसद चले, लेकिन सरकार नहीं चाहती। आज भी स्थगित कर दिया गया। एक बार भी स्पीकर नहीं आए, कुर्सी पर नहीं बैठे। अगर आपके पास सदन चलाने की मंशा है तो इतनी देर तक स्थगन क्यों? सदन चलाने की जिम्मेदारी तो सरकार की है। हम आम बजट पर चर्चा चाहते हैं। सांसद सवाल पूछेंगे-इसीलिए तो जनता ने हमें भेजा है। केंद्र सरकार ने ऐसा बजट पेश किया है कि वह विपक्ष की राजनीतिक आलोचना सहन ही नहीं कर पा रही।”
हालांकि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास लाने के मामले में अभिषेक ने साफ किया कि तृणमूल अवसर देने में विश्वास करती है। उन्होंने कहा, “अगर आपसे गलती होती है तो आपको मौका देना चाहिए। नहीं तो भाजपा और हमारे बीच फर्क ही क्या रहेगा? उपराष्ट्रपति की बात नहीं सुनी जा रही-इसलिए उन्हें एक झटके में हटा दिया गया। हम उनके जैसे नहीं हैं। यही हमारे बीच का फर्क है।”