मुर्शिदाबादः6 से 8 फरवरी तक आयोजित मुर्शिदाबाद हेरिटेज फेस्टिवल 2026 का समापन भव्य और यादगार तरीके से हुआ। तीन दिवसीय इस उत्सव ने आगंतुकों को शहर के गौरवशाली इतिहास, अद्वितीय वास्तुकला और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू कराया। फेस्टिवल में देशभर से विरासत प्रेमी, विद्वान, कलाकार और संस्कृति के अनुरागी शामिल हुए।
आगंतुकों को हाउस ऑफ शहरवाली और बड़ी कोठी जैसी विरासत संपत्तियों में ठहराया गया, जिससे वे मुर्शिदाबाद की ऐतिहासिक विरासत में पूरी तरह डूब सके। उत्सव की शुरुआत पारंपरिक शहरवाली लंच और रानी भवानी पर आधारित एक विशेष फिल्म स्क्रीनिंग से हुई। इसके बाद चार बंगला, रानी भवानी द्वारा निर्मित टेराकोटा मंदिर की सैर, गंगा नदी में नौका विहार, मनोहारी सूर्यास्त और गंगा आरती ने अनुभव को और भी अविस्मरणीय बना दिया।
आगंतुकों ने तांतीपाड़ा का भी दौरा किया, जहां उन्होंने सदियों पुरानी बालूचरी बुनाई परंपरा से जुड़े कुशल कारीगरों के कार्य को नज़दीक से देखा। फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षणों में पारंपरिक नाव दौड़, हजारद्वारी पैलेस संग्रहालय, नासिपुर राजबाड़ी और काठगोला पैलेस के निर्देशित भ्रमण शामिल रहे। इसके अलावा बाउल गायकों, रायबेंशे नर्तकों, कथक कलाकारों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों से सजी सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उत्सव का समापन प्लासी की लड़ाई पर आधारित एक विशेष फिल्म स्क्रीनिंग और विदाई लंच के साथ हुआ, जिससे मेहमान मुर्शिदाबाद की विरासत और गर्मजोशी भरी मेहमाननवाज़ी की मधुर यादें लेकर लौटे। मुर्शिदाबाद हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी के प्रेसिडेंट प्रदीप चोपड़ा ने कहा, “मुर्शिदाबाद हेरिटेज फेस्टिवल 2026 एक उल्लेखनीय सफलता रही। उसने विरासत प्रेमियों, कलाकारों और संस्कृति अनुरागियों को एक साझा मंच प्रदान किया। तीन दिनों में आगंतुकों ने शहर के समृद्ध इतिहास, स्थापत्य चमत्कारों, जीवंत परंपराओं और स्थानीय कारीगरों की अद्भुत कला का अनुभव किया।”
मुर्शिदाबाद हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी के संस्थापक सदस्य संदीप नौलखा ने कहा, “2010 में एमएचडीएस की स्थापना के 16 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह फेस्टिवल न केवल मुर्शिदाबाद के जीवंत इतिहास, शिल्प और परंपराओं का उत्सव था, बल्कि इसका उद्देश्य शहर के गौरव को पुनर्जीवित करना और उसकी विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देना भी था।”
मुर्शिदाबाद हेरिटेज फेस्टिवल 2026 ने शहर की कालातीत वास्तुकला, शिल्प, संगीत, व्यंजन और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करते हुए इसे एक प्रमुख विरासत केंद्र के रूप में स्थापित किया।