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बांग्लार बाड़ी योजनाः घर के पैसे का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए प्रशासन ने बनायी नयी रणनीति

बैंकों को चेतावनी, लाभार्थियों से बॉन्ड और एजेंसियों की मदद से प्रोजेक्ट को 100% सफल बनाने की मुहिम शुरू।

By रिनिका राय चौधुरी, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 10, 2026 18:46 IST

खड़गपुर/ पश्चिम मेदिनीपुर: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'बांग्लार बाड़ी' आवास योजना को जमीन पर पूरी तरह सफल बनाने के लिए पश्चिम मेदिनीपुर जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन का साफ कहना है कि यह योजना जिन गरीब परिवारों के लिए बनाई गई है। उसका लाभ उन्हें ही मिले और घर बनाने के लिए दी गई रकम किसी दूसरे काम में खर्च न हो।

इससे पहले के अनुभव प्रशासन के लिए बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं रहे हैं। कई मामलों में देखा गया है कि लाभार्थियों ने घर निर्माण के लिए मिली राशि का इस्तेमाल दूसरी जरूरतों में कर लिया। कहीं बेटियों की शादी में पैसा खर्च हुआ, तो कहीं मोटरसाइकिल खरीदी गई। कुछ मामलों में पुराने कर्ज चुकाने या अन्य निजी खर्चों में भी योजना की रकम लगा दी गई। इन्हीं कारणों से अब प्रशासन ने निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी हैं।

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आमादेर पाड़ा, आमादेर समाधान, बूथ-टू-बूथ विकास, पथश्री सड़क परियोजना और बांग्लार बाड़ी को सत्ताधारी दल अहम मुद्दा मान रहा है। ऐसे में आवास योजना का समय पर और सही तरीके से पूरा होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले चरण में पश्चिम मेदिनीपुर जिले को 1 लाख 11 हजार बांग्लार बाड़ी आवास मिले थे। दूसरे चरण में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 80 हजार हो गई। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में मिले 1.11 लाख घरों में से करीब 96 हजार घर बन चुके हैं, लेकिन लगभग 15 हजार घर अब तक नहीं बन पाए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कुछ लाभार्थियों ने घर बनाने के बजाय इन पैसों को किसी और जरूरत पर खर्च कर दिये।

बार-बार नोटिस देने के बावजूद जब स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ, तो प्रशासन ने इस बार नई रणनीति अपनाई है। इसके तहत कुछ वर्गों, खासकर गरीब लोधा समुदाय के लिए घर निर्माण में एजेंसियों की मदद ली जा रही है। साथ ही लाभार्थियों से बॉन्ड लिखवाया जा रहा है।

इस बॉन्ड में लाभार्थी यह लिखकर देते हैं कि पहली किस्त के रूप में मिले 60 हजार रुपये से वे 20 दिनों के भीतर घर का शुरुआती काम पूरा करेंगे। दूसरी किस्त मिलने पर तय समय में पूरा घर बनाएंगे। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

दियापुर की लाभार्थी कल्पना ने बताया, “मुझे घर मिल गया है। मैं इस पैसे को किसी और काम में खर्च नहीं करूंगी। मैंने बॉन्ड दिया है और घर बनाऊंगी।” वहीं मुरास्थी गांव के लक्ष्मीकांत और शम्पा ने भी कहा कि वे योजना की रकम से ही पक्का घर बनाएंगे और पैसे का गलत इस्तेमाल नहीं करेंगे।

डेबरा के बीडीओ प्रियब्रत राढ़ी ने कहा, “हमारे अनुभव में 47 ऐसे लाभार्थी सामने आए हैं, जो अब तक घर नहीं बना पाए। इस बार हमारा लक्ष्य है कि हर किसी के सिर पर छत हो। इसके लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाई जा रही हैं।”

प्रशासन ने बैंकों को भी सख्त चेतावनी दी है। उनसे कहा गया है कि यदि कोई लाभार्थी जल्दबाजी में पूरी राशि निकालने की कोशिश करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत प्रशासन को दी जाए। पश्चिम मेदिनीपुर जिला परिषद की सभाधिपति प्रतिभा रानी माइति ने कहा, “अगर घर बनाने का पैसा दूसरे कामों में खर्च हो गया, तो गरीब परिवार दोबारा घर नहीं बना पाएंगे। इंसानियत के नजरिए से मैंने बैंकों से सतर्क रहने को कहा है।”

प्रशासन का मानना है कि सख्त निगरानी, बॉन्ड सिस्टम और बैंकों के सहयोग से इस बार बांग्लार बाड़ी योजना को पूरी तरह सफल बनाया जा सकेगा और जरूरतमंदों का अपने घर का सपना पूरा हो सकेगा।

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