नयी दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से बेहद सहज और आत्मीय अंदाज़ में कहा कि तकनीक हमारी मदद के लिए है, हमारा मालिक बनने के लिए नहीं। उन्होंने समझाया कि आज कई बच्चों की दिनचर्या मोबाइल और स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमने लगी है, यहाँ तक कि वे बिना देखे-सुने खाना भी नहीं खाते। यह आदत सही नहीं है। हर दौर में नई तकनीक आती है और शुरुआत में डर भी लगता है, लेकिन डरने की ज़रूरत नहीं-बस यह तय करना ज़रूरी है कि तकनीक हमें नियंत्रित न करे।
उन्होंने AI यानी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर साफ कहा कि AI सीखने का विकल्प नहीं है। इसका इस्तेमाल मार्गदर्शन, समझ बढ़ाने और काम को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, न कि दिमाग़ लगाना बंद करने के लिए। जैसे समय के साथ बैलगाड़ी से हवाई जहाज़ तक सफ़र बदला, वैसे ही नौकरियाँ और काम के तरीके बदलते रहेंगे, लेकिन जो लोग तकनीक को समझकर अपनी क्षमता बढ़ाते हैं, वही आगे बढ़ते हैं।
वार्षिक कार्यक्रम 'परीक्षा पे चर्चा' के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड में परीक्षाओं को लेकर मोदी ने सरल सलाह दी कि पुराने प्रश्नपत्र हल करें, मन लगाकर तैयारी करें और अच्छी नींद लें। तैयारी पक्की होगी तो तनाव अपने-आप दूर रहेगा। उन्होंने अभिभावकों से भी कहा कि बच्चों की तुलना दूसरों से न करें क्योंकि हर बच्चा अलग होता है।
नेतृत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नेता वही होता है, जो बिना इंतज़ार किए पहल करे। कचरा उठाने जैसा छोटा काम भी दूसरों को प्रेरित कर सकता है। नेतृत्व भाषण या चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को समझने, उनसे संवाद करने और उन्हें भरोसा दिलाने की कला है। अपने विचार साफ़ और प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुँचा पाना एक ज़रूरी गुण है।
करियर और सफलता के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सफल लोगों से प्रेरित होना स्वाभाविक है, लेकिन सिर्फ़ उनकी उपलब्धियाँ नहीं, उनके पीछे की मेहनत और अनुशासन भी देखें। सच्ची सफलता शोर नहीं मचाती, वह खुद पहचानी जाती है। पढ़ाई और शौक के संतुलन पर उन्होंने बताया कि रचनात्मकता सीखने को आसान बनाती है। कला और विज्ञान साथ-साथ चल सकते हैं, बस शिक्षा प्राथमिकता बनी रहे।
स्टार्टअप पर सलाह देते हुए मोदी ने कहा कि पहले यह तय करें कि आप करना क्या चाहते हैं। छोटी-सी टीम बनाकर, मौजूदा स्टार्टअप्स को समझकर, ईमानदारी से प्रोजेक्ट तैयार करें। उम्र कोई बाधा नहीं है। छोटे प्रयास भी बड़ा असर डाल सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज कक्षा 10-12 के छात्र भी ‘विकसित भारत 2047’ का सपना देख रहे हैं, यह खुशी की बात है। विकसित देश बनने के लिए छोटी-छोटी आदतें अपनानी होंगी जैसे खाना बर्बाद न करना और जीवन में अनुशासन रखना। उन्होंने अपने शिक्षकों और मां की भूमिका याद करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन को गढ़ने में उनका सबसे बड़ा योगदान होता है।
2018 में शुरू हुआ परीक्षा पे चर्चा टाउनहॉल शैली के छात्र संवाद के रूप में शुरू होकर भारत के सबसे बड़े शैक्षिक सहभागिता कार्यक्रमों में से एक बन गया है। पंजीकरण 2023 में लगभग 38.8 लाख से बढ़कर 2024 में 2.26 करोड़ हुए और 2025 में 3.53 करोड़ तक पहुंचे, जिससे कार्यक्रम को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिला। नौवें संस्करण ने 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण का पहला एपिसोड पिछले सप्ताह प्रसारित हुआ था।