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‘कभी-कभी मिज़ाज भी दिखाना पड़ता है’-अमेरिका के साथ सौदेबाज़ी के दौरान क्या करता रहा नई दिल्ली? पीयूष का बड़ा संकेत

जब सीधी उंगली से घी न निकले…द्विपक्षीय व्यापार समझौते के दौरान नई दिल्ली ने मानो इसी कहावत को अपना मूल मंत्र बना लिया।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Feb 08, 2026 22:15 IST

नयी दिल्लीः हर बार सीधी उंगली से घी नहीं निकलता। तब उंगली डेढ़ी करनी पड़ती है। अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान नई दिल्ली ने मानो इसी कहावत को अपना आदर्श मान लिया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “व्यापार वार्ता का मतलब है दिमाग ठंडा रखना। लेकिन कभी-कभी मिज़ाज भी दिखाना पड़ता है।”

उन्होंने इस समझौते को एक बड़ी सफलता भी बताया।

शनिवार देर रात व्हाइट हाउस ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दिया। इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने समझौते के मुख्य बिंदुओं को समझाया कि कहां भारत को फायदा हुआ, किन-किन उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह हटा दिया गया, निर्यातकों और किसानों को वास्तव में लाभ होगा या नहीं आदि बातों का विवरण दिया। इसके बाद उन्होंने कहा, “ऐसी वार्ताओं में पहले से हालात को समझना पड़ता है। आगे क्या हो सकता है, इसका अनुमान भी लगाना होता है।”

इसके बाद ही केंद्रीय मंत्री ने “मिज़ाज दिखाने” की बात उठाई। उनके अनुसार, “दिमाग ठंडा रखना सबसे ज़रूरी है। लेकिन कभी-कभी मिज़ाज दिखाना भी पड़ता है। प्रभाव डालने के लिए यह अहम होता है।”

व्यापार समझौते के बाद ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। इस संदर्भ में पीयूष गोयल ने कहा, “पड़ोसी देशों की तुलना में हमें कहीं कम टैरिफ देना होगा। रत्न और फार्मा उद्योग पर से टैरिफ हटा दिया गया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि कृषि और डेयरी उद्योग को इस समझौते से बाहर रखा गया है।

2024 में दूसरी बार राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू कर दी थी। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। अप्रैल में मसौदा या ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ भी तय हो गया। लेकिन उसके बाद मामला अटक गया। अमेरिका के व्यापारियों के लिए कृषि और डेयरी बाजार खोलने की मांग पर नई दिल्ली सहमत नहीं हुई।

इसके बाद जून 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। उनका आरोप था कि चूंकि अमेरिकी उत्पाद भारत के बाजार में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करने के लिए भारत को ऊंचा शुल्क देना होगा। लेकिन ट्रंप सिर्फ 25 प्रतिशत पर ही नहीं रुके। रूस से तेल खरीदने के कारण अगस्त में उन्होंने और 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। इस तरह कुल टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया।

3 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने के बाद ही ट्रंप ने समझौता अंतिम रूप देने की घोषणा की। इसके पीछे उन्होंने मुख्य रूप से तीन कारण बताए।

पहला-मोदी ने कथित तौर पर उन्हें आश्वासन दिया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।

दूसरा-मोदी के प्रति उनका सम्मान। साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी ने व्यक्तिगत रूप से उनसे समझौते के लिए अनुरोध किया था, जिसे वे ठुकरा नहीं पाए।

तीसरा-मोदी ने कथित तौर पर अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाकर शून्य करने का भरोसा दिया।

हालांकि इन तीनों मुद्दों पर नई दिल्ली ने चुप्पी साधे रखी है। एक शब्द भी नहीं कहा गया। खुद मोदी ने भी इस पर कुछ नहीं बोला। उन्होंने केवल टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया।

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