पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने शनिवार (7 फरवरी) को बताया कि चुनाव आयोग के पास उन्होंने SIR की सुनवाई की समयसीमा को बढ़ाने का लिखित आवेदन किया है। अगर इस आवेदन को स्वीकार कर लिया जाता है तो SIR की समयसीमा 14 फरवरी तक बढ़ जाएगी।
14 फरवरी को ही अंतिम मतदाता सूची जारी होने वाली थी। अगर SIR की सुनवाई की समयसीमा बढ़ती है तो अंतिम मतदाता सूची के जारी होने की समयसीमा के भी टलने की पूरी संभावना जतायी जा रही है। पर क्या होगा अगर अंतिम मतदाता सूची में बतौर मतदाता आपका नाम न हो? क्या आप चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे?
अगर अंतिम मतदाता सूची में आपका नाम न हो तब भी आप अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने उपाय बताया है।
क्या करें अगर मतदाता सूची में न दिखे नाम?
अगर SIR की सुनवाई में किसी भी कारणवश उपस्थित न होने या किसी अन्य कारण से किसी वैध मतदाता का नाम अंतिम मतदाता सूची से कट जाता है तो उसे बतौर मतदाता खुद को फिर से एनरोल करवाना होगा। इसके लिए उस व्यक्ति को फॉर्म 6 भरकर जमा देना होगा।
TOI की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार अगर किसी मतदाता का नाम SIR की सुनवाई में उपस्थित होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची में दिखाई नहीं दे रहा है या किसी कारणवश उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है तो वह पहले DEO के पास और बाद में CEO के पास मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है।
कब करना होगा आवेदन?
चुनाव आयोग के एक अधिकारी के हवाले से बताया जाता है कि जिन मतदाताओं का नाम अंतिम मतदाता सूची में नहीं है वे सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ जिलाधिकारी या DEO के पास अंतिम मतदाता सूची जारी होने के 5 दिनों के अंदर आवेदन कर सकता है। आवेदन प्राप्त करने के बाद जिलाधिकारी या DEO उन्हें सुनवाई के लिए बुला सकते हैं। अगर DEO उक्त व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार कर देता है तो व्यक्ति CEO के पास आवेदन कर सकता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गत शुक्रवार (6 फरवरी) तक करीब 5 लाख ऐसे लोग थे जिन्हें सुनवाई का नोटिस तो भेजा गया था लेकिन किसी कारणवश वे सुनवाई में उपस्थित नहीं हो पाए थे। इन सभी नामों को अंतिम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। बताया जाता है कि ऐसा माना जा रहा है कि जो लोग सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए या तो ऐसे व्यक्तियों का कोई अस्तित्व ही नहीं है अथवा इनके पास चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज नहीं है जिसे वे AERO के सामने प्रस्तुत कर सकें।
वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार तक राज्य में लगभग 6 लाख ऐसे लोग हैं जिनकी सुनवाई बाकी है। राज्य के CEO मनोज अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए शनिवार की शाम को बताया कि सुनवाई के लिए जितने लोगों को बुलाया गया था उनमें से मात्र 3%-4% ही बाकी है। जितनी सुनवाई हो चुकी है उसमें से 75%-80% लोगों के दस्तावेज अपलोड हो चुके हैं और अपलोड हो चुके दस्तावेजों में से लगभग 70%-80% का सत्यापन भी किया जा चुका है।