अलीपुर में CBI की विशेष अदालत में हाजिर होने के बावजूद न तो सरेंडर कर पाएं और न ही गिरफ्तारी हुई। शनिवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के पूर्व डेप्यूटी सुपर अख्तर अली के साथ ऐसा ही हुआ। पर आखिर ऐसा कैसे हो गया?
हावड़ा के एक निजी अस्पताल में भर्ती अख्तर अली शनिवार को आत्मसमर्पण के लिए अलीपुर में CBI की विशेष अदालत में हाजिर तो हुए लेकिन आत्मसमर्पण से पहले कोर्ट में जो आवश्यक दस्तावेज जमा देना होता है, वह उन्होंने जमा नहीं किया था। शनिवार को अदालत में न तो CBI के वकील और न ही अख्तर अली के वकील उपस्थित थे।
मिली जानकारी के अनुसार दोपहर में करीब 12.30 बजे अदालत के बंद हो जाने की वजह से अख्तर अली बिना आत्मसमर्पण किए ही वापस लौट गए। सोमवार को वह फिर से अदालत में आने वाले हैं। गौरतलब है कि अख्तर अली को न्यायाधीश ने शुक्रवार को ही आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
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इस बारे में वकील जयंत नारायण चटर्जी का कहना है कि अभियुक्त ने आत्मसमर्पण का आवेदन ही अदालत में जमा नहीं किया था। इसका मतलब यह माना जा सकता है कि वह खुद को मीडिया के सामने जाहिर करने गए थे। सबसे ताज्जुब की बात यह रही कि पुलिस ने भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया और जाने दिया।
अदालत में प्रवेश करते समय अख्तर अली ने शनिवार को कहा, "मैं बीमार हूं। अस्पताल में भर्ती था और पास में मोबाइल भी नहीं था। इसलिए मुझे पता नहीं था कि शनिवार को अदालत जल्दी बंद हो जाता है। आया तो था लेकिन किस्मत ही खराब है। वकील के साथ बात करके अगला कदम उठाउंगा।"
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उन्होंने आगे कहा कि साल 2024 में आरजी कर की घटना घटी थी। संदीप घोष उससे दो साल पहले वहां प्रिंसिपल बनकर आए थे। मेरे बड़े भाई साल 2020 में बीमार पड़े थे। जिन रुपयों की बात की जा रही है, वह भैया के इलाज के लिए ही उधार लिया था। अब षड्यंत्र करके भ्रष्टाचार में मुझे फंसाया जा रहा है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डेप्यूटी सुपर का दावा है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में होने वाले भ्रष्टाचारों के खिलाफ मुंह खोलने की वजह से ही उन्हें फंसाया जा रहा है।