किसी जमाने में कैंसर को धनवानों की बीमारी का नाम दिया जाता था क्योंकि इसके इलाज में होने वाला खर्च समाज के निम्न व मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वहन करना संभव नहीं हो पाता था। अब स्थिति बदल रही है। आम लोगों के स्वास्थ्य और सुविधाओं का ध्यान रखते हुए अब कोलकाता में ही कैंसर ट्रिटमेंट हब (Cancer Treatment Hub) बनाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
कैंसर के इलाज में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगभग डेढ़ साल पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बड़ा फैसला लिया था जिसे अब वास्तविकता के धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने मुंबई के प्रसिद्ध टाटा मेमोरियल अस्पताल के संयुक्त रूप से एसएसकेएम अस्पताल में कैंसर ट्रिटमेंट हब बनाने का फैसला लिया था। अब अस्पताल के मुख्य परिसर के ठीक विपरीत में अत्याधुनिक 10 मंजिला कैंसर ट्रिटमेंट हब बनाया जा रहा है। कब से शुरू होगा यहां मरीजों का इलाज?
मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक चरण में इस हब में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी जैसे विभागों में आउटडोर की सुविधा उपलब्ध करवायी जाएगी। बाद में धीरे-धीरे इंडोर इलाज की सुविधा शुरू होगी। बताया जाता है कि अप्रैल 2026 से ही यहां मरीजों का आंशिक तौर पर इलाज शुरू हो जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संरचना के तहत कैंसर के अत्याधुनिक इलाज को एक ही जगह पर लाकर दूसरे राज्यों में इलाज के लिए मरीजों को दौड़ने की समस्या से मुक्ति दिलाना ही इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। बताया जाता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक अगले 2 दशक में कैंसर मरीजों की संख्या करीब डेढ़ गुना तक बढ़ जाएगी। इस आशंका को मद्देनजर रखते हुए ही राज्य में कैंसर के इलाज का एक हब बनाने की तैयारियां चल रही हैं।
अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस नए कैंसर ट्रिटमेंट हब के चेयरमैन आलोक घोषदस्तीदार ने बताया कि कैंसर के इलाज में उपयोगी करीब 100 करोड़ रुपए के इलाज की मशीन मंगाई जा चुकी हैं। इनमें अत्याधुनिक ब्रैकीथेरेपी मशीन, रेडियोथेरेपी मशीन आदि शामिल हैं। बताया जाता है कि फिलहाल केंद्रीय एटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड से अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है जिसके अगले कुछ महीनों में मिल जाने की संभावना है।