लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा विश्वविद्यालय के एक छात्र को दिए गए विवादित प्लेकार्ड सजा आदेश को रद्द कर दिया। सजा के रूप में छात्र को 30 दिन तक विश्वविद्यालय के गेट पर खड़े होकर एक प्लेकार्ड पकड़े रहने के लिए कहा गया था। जिस पर लिखा था कि मैं किसी लड़की के साथ कभी गलत व्यवहार नहीं करूंगा।
चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की डिवीजन बेंच ने इस दिशा-निर्देश को रद्द करते हुए कहा कि यह अनुचित और अपमानजनक है और इससे छात्र के चरित्र पर स्थायी दाग लग सकता है।
छात्र को मार्च 2023 में नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा निष्कासित किया गया था। उसके ऊपर अन्य संस्थाओं की महिला छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगे थे। छात्र ने इस निष्कासन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
29 अक्टूबर 2025 को एक सिंगल जज बेंच ने निष्कासन आदेश को रद्द किया, लेकिन छात्र को पुनः दाखिला देने के लिए कुछ शर्तें तय कीं। इनमें से एक शर्त यह थी कि छात्र 3 नवंबर 2025 से लगातार 30 दिन तक सुबह 8:45 से 9:15 बजे तक विश्वविद्यालय के गेट पर प्लेकार्ड पकड़े खड़ा रहेगा। छात्र के वकील ने डिवीजन बेंच के सामने कहा कि यह सजा अत्यधिक अपमानजनक है और इसके कारण छात्र के भविष्य पर स्थायी और हानिकारक प्रभाव पड़ेगा।
डिवीजन बेंच ने 4 फरवरी के आदेश में कहा कि हम दृढ़ता से मानते हैं कि इस प्रकार का आदेश किसी भी परिस्थितियों में न्यायसंगत नहीं है। यह न केवल अपमानजनक है, बल्कि अपीलकर्ता के चरित्र पर स्थायी दाग भी लगा सकता है, जो इस मामले में आवश्यक नहीं है।