नोएडाः नोएडा के सेक्टर-94 स्थित मोर्चरी में चिपियाना गांव के रहने वाले युवक रचित का पोस्टमार्टम किया गया था। सूत्रों के अनुसार रचित की मौत कथित तौर पर आत्महत्या से हुई थी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो ज़िम्मेदारी आमतौर पर मोर्चरी स्टाफ की होती है, वह काम मृतक के परिजनों को खुद करना पड़ा।
रचित के परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद मोर्चरी कर्मचारियों ने शव को ढकने के लिए कपड़ा देने से इनकार कर दिया। परिवार का यह भी कहना है कि उस समय कोई स्टाफ उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं था। परिजनों के मुताबिक, मोर्चरी स्टाफ ने उनसे एक निश्चित राशि की मांग की और जब उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया तो उनसे कहा गया कि वे खुद ही शव लपेटने का इंतज़ाम करें।
मजबूरी की स्थिति में रचित के परिजनों को उसका निर्वस्त्र शव अपने हाथों से कपड़े में लपेटना पड़ा। इसी दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी स्थिति का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में एक व्यक्ति यह आरोप लगाते हुए सुना गया कि न तो शव ढकने के लिए कपड़ा दिया गया और न ही कोई कर्मचारी मदद के लिए आया, बल्कि परिवार से पैसे मांगे गए।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी नाराज़गी देखने को मिली। लोगों ने सवाल उठाए कि पोस्टमार्टम हाउस जैसे संवेदनशील स्थान पर बुनियादी मानवीय व्यवस्था क्यों नहीं की गई और कर्मचारियों ने इतनी असंवेदनशीलता क्यों दिखाई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने इस घटना की जांच के आदेश दिए। उन्होंने मोर्चरी के नोडल अधिकारी को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की विस्तार से जांच की जाए। डॉ. नरेंद्र कुमार ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में किसी भी कर्मचारी की लापरवाही, दुर्व्यवहार या पैसे मांगने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जांच में यह देखा जाएगा कि स्टाफ मौके पर क्यों मौजूद नहीं था, शव ढकने के लिए कपड़ा क्यों नहीं दिया गया और परिजनों से पैसे मांगने के आरोप कितने सही हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।