लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बरेली में निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने मंगलवार को जिला कलेक्टरेट कार्यालय के बाहर धरना दिया। हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने वाले अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के कैंप कार्यालय में जबरन रोके रखने की साजिश रची गई थी। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन पहले ही उन्होंने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दिया था। मीडिया से बात करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था और जिला मजिस्ट्रेट के कैंप कार्यालय में उन्हें पूरी रात रोकने की योजना बनाई गई थी। इस साजिश की जानकारी मिलने पर उन्होंने बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडेय से संपर्क कर मीडिया को सूचित करने को कहा। जैसे ही मीडिया को इस कथित साजिश की जानकारी मिली, उन्हें वहां से जाने दिया गया।
अग्निहोत्री ने दावा किया कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसके तहत उनसे कोई बयान दिलवाकर किसी अन्य आरोप में उन्हें निलंबित किया जाना था। उन्होंने कहा कि निलंबन आदेश के खिलाफ वे अदालत का रुख करेंगे और फोन पर हुई पूरी बातचीत की जांच होनी चाहिए। आगे की रणनीति जल्द तय की जाएगी।
इससे पहले अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज में माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उनका आरोप है कि मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्नान के लिए पहुंचे थे, जहां उनके शिष्यों और बुजुर्ग संन्यासियों के साथ लात-घूंसे और जूतों से मारपीट की गई। अग्निहोत्री ने कहा कि यदि प्रशासन इस तरह का व्यवहार करेगा तो समाज में गंभीर परिणाम हो सकते हैं और यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।