सिलीगुड़ीः उत्तर बंगाल के नक्सलबाड़ी की सरस्वती राय, पिंकी देवनाथ और शिप्रा भावल जैसी महिलाएं एक अलग सोच लेकर सामने आई हैं। उन्होंने अस्पताल में नवजात बच्चों को जन्म देने वाली माताओं के लिए सैनेटरी पैड बनाना शुरू किया है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत भी होंगी और दूसरों की मदद भी कर सकेंगी।
उनकी टीम ने मिलकर ‘नक्सलबाड़ी सैनेटरी मार्ट कोऑपरेटिव लिमिटेड’ के नाम से उत्पादन शुरू किया है। फिलहाल उनका उत्पाद कई सरकारी अस्पतालों में पहुंच चुका है और उत्तर बंगाल के आठ जिलों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
स्वनिर्भर समूह की प्रमुख बिनीता झा कहती हैं, "सरकारी ऑर्डर सही मात्रा में मिले तो हम कम से कम 200 महिलाओं को रोजगार दे सकते हैं। इस काम में सिलिगुड़ी महकमा परिषद के ‘आनंदधारा’ प्रोजेक्ट ने भी सहयोग किया है।"
‘आनंदधारा’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मौसमी पात्र ने बताया, "राज्य भर के स्वनिर्भर समूह अलग-अलग क्षेत्रों में अपने काम साबित कर रहे हैं। नक्शलबाड़ी का समूह प्रशिक्षण लेकर सैनेटरी पैड बनाने उतर चुका है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें कई अस्पतालों में सप्लाई का अधिकार मिलेगा।"
स्वनिर्भर समूह की महिलाएं अब रोजाना 25 हजार पैकेट पैड बनाने का लक्ष्य रख रही हैं। एक पैकेट में पांच सौ पैड होते हैं और यह सिर्फ 55 रुपये में उपलब्ध हैं, जबकि बाजार में कीमत काफी अधिक है। शुरुआत में उपकरण ‘आनंदधारा’ से मिले, लेकिन महिलाओं ने खुद एक लाख बहत्तर हजार रुपये निवेश करके और मशीनें खरीदी हैं।
बिनीता और पिंकी कहती हैं, "महिलाओं की समस्याओं को महिलाएं ही बेहतर समझ सकती हैं। यही वजह है कि हमने यह परियोजना शुरू की। इससे न केवल महिलाओं की मदद होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।"
उत्तर बंगाल में लगभग 11,500 स्वनिर्भर समूह सक्रिय हैं। हर समूह में औसतन 11 सदस्य होते हैं। एक लाख से अधिक महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। कुछ समूह अस्पतालों में कैटरिंग, कुछ नर्सरी और कुछ केक या अचार बनाने का काम कर रहे हैं।