कोलकाता: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से देश के वस्त्र, होसियरी और परिधान उद्योग को वैश्विक बाजार में नई ताकत मिलने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल होसियरी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रमेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि समझौते के लागू होने पर भारतीय निर्यातकों को यूरोप में बेहतर बाजार पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
अग्रवाल ने बताया कि समझौते से विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के उद्योग क्लस्टर्स को फायदा होगा। उन्होंने कहा, "जब यह समझौता लागू होगा, तो भारतीय वस्त्र निर्यातक बांग्लादेश की तुलना में यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में होंगे। यह फायदा वर्तमान परिदृश्य में और भी महत्वपूर्ण हो गया है।"
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि समझौते को लागू होने में अभी समय लग सकता है, क्योंकि इसे यूरोपीय संघ के प्रत्येक सदस्य देश के संसद द्वारा अनुमोदन की आवश्यकता होगी।
निर्यात संभावनाओं पर प्रभाव
रमेश अग्रवाल ने कहा कि भारत के वस्त्र निर्यात में बड़ी तेजी आ सकती है अगर अभी लंबित दो व्यापार समझौते भी पूर्ण रूप से लागू हो जाते हैं। उनके अनुसार, वर्तमान में लगभग 75,000 करोड़ रुपये के वस्त्र निर्यात को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया जा सकता है। इसके अलावा, अमेरिका और अन्य विदेशी बाजारों में निर्यात संबंधी चुनौतियों को दूर करने से और भी विस्तार की संभावना है।
उन्होंने उद्योग की अपेक्षाओं के बारे में कहा कि बजट में कर सुधारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे मध्यवर्ग की खरीद शक्ति बढ़े और घरेलू मांग को भी बढ़ावा मिले। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार नीति परिवर्तनों से बजट घोषणाओं का दीर्घकालिक असर कम हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ईयू FTA भारतीय वस्त्र और होसियरी उद्योग के लिए ऐतिहासिक अवसर है। यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त से न केवल निर्यात बढ़ सकता है, बल्कि उद्योग में रोजगार सृजन, उत्पादन विस्तार और नवाचार के नए रास्ते भी खुलेंगे। पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के छोटे और मझोले उद्योगों को भी इससे लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
FTA के लागू होने के बाद भारतीय वस्त्र निर्यातकों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादन की मांग और निर्यात में नई रणनीतियों के अवसर खुलेंगे। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता विशेष रूप से होसियरी और परिधान के क्लस्टर्स के लिए गेम चेंजर साबित होगा।