बगहा: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल में गोबरहिया थाना क्षेत्र दहेज प्रथा के खिलाफ अद्भुत उदाहरण पेश कर रहा है। थारू समाज में दहेज लेना या देना सदियों से वर्जित है। इसी सामाजिक अनुशासन के चलते यहां पिछले 29 सालों में दहेज उत्पीड़न का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
थारू समाज में विवाह को केवल दो परिवारों और दो दिलों के बीच पवित्र बंधन माना जाता है, न कि आर्थिक लेन-देन का माध्यम। अगर कोई व्यक्ति दहेज लेने या देने की कोशिश करता है, तो समाज उसे सामाजिक बहिष्कार का सामना कराता है। यही कड़ी सामाजिक अनुशासन इस इलाके को दहेज-मुक्त बनाए हुए है।
थारू समाज में बेटियों को बोझ नहीं बल्कि परिवार और समाज का गौरव माना जाता है। यहां शादी में न दिखावा होता है और न आर्थिक लेन-देन। पहले बाराती अपने घर से खाना लेकर जाते थे और दुल्हन के घर का भोजन अगले दिन ही खाते थे। शादी में केवल आत्मीयता, सम्मान और संस्कार होते हैं। लक्ष्मीना देवी कहती हैं, “हमारे गांव में कोई भी दहेज नहीं लेता। अधिकांश लोग मजदूरी करते हैं, इसलिए दहेज देना या लेना असंभव भी है। यही हमारी परंपरा है।” इस परंपरा के कारण विवाह सामाजिक संबंधों और विश्वास का प्रतीक बनता है, न कि धन का माध्यम।
गोबरहिया थाना क्षेत्र केवल दहेज-मुक्त नहीं है, बल्कि अपराध नियंत्रण में भी राज्य के लिए मिसाल बना हुआ है। हत्या, चोरी, डकैती और छेड़छाड़ जैसी घटनाएं नगण्य हैं। 1996 में बगहा जिले के गठन और गोबरहिया थाना की स्थापना के बाद से यह क्षेत्र शांति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना हुआ है। सामाजिक अनुशासन और परंपरा की यही ताकत महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा की गारंटी देती है।
थारू समाज की कड़ी परंपरा यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति दहेज लेने या देने की सोच भी न सके। पुलिस प्रशासन भी मानता है कि सख्त सामाजिक नियम और समुदाय की एकजुटता ही दहेज और अपराध को रोकने का सबसे बड़ा उपाय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अन्य समुदाय थारू समाज जैसी परंपराएं अपनाएं, तो दहेज जैसी कुरीति का तेजी से अंत किया जा सकता है।
गोबरहिया थाना क्षेत्र थारू समाज की सामाजिक अनुशासन और परंपरा की ताकत का जीवंत उदाहरण है। यह साबित करता है कि समुदाय का सहयोग, परंपरा और सख्त सामाजिक नियम ही दहेज जैसी कुरीतियों पर काबू पा सकते हैं। बिहार में जहां हर साल सैकड़ों दहेज उत्पीड़न के मामले सामने आते हैं, यह क्षेत्र सकारात्मक मॉडल के रूप में उजागर होता है। इस क्षेत्र की मिसाल अन्य राज्यों और समुदायों के लिए भी मार्गदर्शक हो सकती है।