दावोस,स्विट्जरलैंडः केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में कहा कि भारत अगले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उनका कहना है कि पिछले दशक में लागू किए गए सोचे-समझे संरचनात्मक सुधार और फोकस्ड एक्जीक्यूशन ने देश को इस मुकाम तक पहुंचाने का आधार तैयार किया है।
मंत्री ने उम्मीद जताई कि भारत आने वाले वर्षों में 6-8% रियल ग्रोथ दर बनाए रख सकता है। उन्होंने इस विकास को चार रणनीतिक स्तंभों से जोड़ा। पहला-भौतिक, डिजिटल और सामाजिक बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश। दूसरा- समावेशी विकास, ताकि समाज का हर वर्ग देश की प्रगति का हिस्सा बने। तीसरा-मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को बढ़ावा। चौथा-नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वैष्णव ने कहा कि इस प्रक्रिया में सबसे गरीब वर्ग की सुरक्षा प्राथमिकता होगी और तकनीकी आधार के कारण भारत अगले पांच वर्षों में 95% विश्वास अंतराल के साथ विकास कर सकता है।
विशेषज्ञों की राय और सतर्कता
अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने इस दृष्टिकोण का समर्थन किया और कहा कि यदि कोई बड़ा वैश्विक संकट नहीं आता, तो भारत 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि असली चुनौती केवल अर्थव्यवस्था के आकार में नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है।
गोपीनाथ ने भूमि अधिग्रहण, श्रम बाजार की असंगति और न्यायपालिका में देरी को विकास की निरंतरता के लिए प्रमुख बाधा बताया। उन्होंने कहा कि भारत की उत्पादन संरचना पूंजी-गहन है और श्रम योगदान केवल 30% तक सीमित है।
वैश्विक और घरेलू जोखिम
वैष्णव ने वैश्विक वित्तीय अस्थिरता को भी भारत के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि धनी देशों का भारी कर्ज और आर्थिक अस्थिरता भारत के विकास पर असर डाल सकती है। जापान में हाल ही में बॉन्ड मार्केट में आई गड़बड़ी इसका उदाहरण है।
देश के भीतर, भूमि और श्रम सुधार, श्रम कौशल और रोजगार के बीच तालमेल विकास की निरंतरता के लिए अहम हैं। गोपीनाथ ने कहा कि जनसंख्या लाभ को भुनाने के लिए श्रम बाजार की लचीलापन और कौशल विकास बेहद जरूरी है।
सरकारी प्रतिबद्धता और आगे का रोडमैप
वैष्णव ने सरकार की “सहकारी संघवाद” (Cooperative Federalism) की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में लागू सुधारों को उदाहरण के तौर पर पेश किया। इसके अलावा, श्रम सुधारों और न्यूक्लियर ऊर्जा जैसे सेक्टरों में निजी निवेश को भारत की आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मंत्री ने वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित किया कि वे भारत में अवरोधों और अवसरों पर प्रतिक्रिया दें। उन्होंने कहा कि हम यहां आपके विकास के लिए उत्प्रेरक बनने आए हैं।