ढाकाः बांग्लादेश की एक अदालत ने बुधवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और 285 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मामले में आरोप तय करने की अगली सुनवाई के लिए 9 फरवरी की तारीख निर्धारित की है।
यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा गया है कि शेख हसीना और अवामी लीग के सैकड़ों सदस्यों ने दिसंबर 2024 में ‘जॉय बंगला ब्रिगेड’ नामक एक समूह की वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया था। आरोप है कि इस बैठक के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को सत्ता से हटाने की साजिश रची गई।
ढाका की विशेष न्यायाधीश अदालत-9 के न्यायाधीश एमडी अब्दुस सलाम ने इस संबंध में बचाव पक्ष की अलग-अलग याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संगस्था ने यह जानकारी दी।
286 अभियुक्तों में से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 259 अभी फरार हैं और उनके खिलाफ अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया जा रहा है। पिछले वर्ष 14 अक्टूबर को अदालत ने हसीना समेत सभी फरार अभियुक्तों को अदालत में पेश होने के लिए अखबारों में नोटिस प्रकाशित करने का आदेश दिया था। मामले के बयान के अनुसार 19 दिसंबर 2024 को “जॉय बंगला ब्रिगेड” शीर्षक से एक वर्चुअल बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें शामिल लोगों ने कथित तौर पर शेख हसीना को दोबारा देश की प्रधानमंत्री बनाने के लिए गृहयुद्ध छेड़ने की कसम खाई थी। इस ज़ूम बैठक में देश और विदेश से कुल 577 लोगों ने भाग लिया और हसीना के निर्देशों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई।
सीआईडी की जांच में पाया गया कि अमेरिका स्थित अवामी लीग नेता डॉ. रब्बी आलम द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन बैठक में वैध सरकार का विरोध करने और राज्य के खिलाफ विद्रोह भड़काने से संबंधित चर्चाएं हुई थीं। सीआईडी के एएसपी एमडी एनामुल हक ने 27 मार्च 2025 को शेख हसीना और 72 अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में देशद्रोह का मामला दर्ज कराया था।
जांच पूरी होने के बाद, 14 अगस्त को सीआईडी अधिकारी ने हसीना समेत 286 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने आरोप पत्र स्वीकार करते हुए सभी अभियुक्तों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में एक विशेष ट्रिब्यूनल ने छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर उनकी सरकार की कथित क्रूर कार्रवाई के लिए शेख हसीना को “मानवता के खिलाफ अपराधों” के आरोप में अनुपस्थिति में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। जुलाई और अगस्त 2024 में हुए हिंसक छात्र आंदोलनों के बाद सत्ता से हटाई गईं शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को भारत चली गई थीं। इसके तीन दिन बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला, जिसने एक कार्यकारी आदेश के जरिए हसीना की अवामी लीग पार्टी को भंग कर दिया।