🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

अमेरिकी व्यापार नीति में टैरिफ रहेंगे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नहीं बदलेगा रुख, ट्रंप के पास अन्य कानूनी विकल्प मौजूद

ट्रंप मनमाने ढंग से टैरिफ लगाते रहे हैं। ट्रंप ने कनाडा पर इसलिए टैरिफ लगाने की धमकी दी है क्योंकि वहां उनके व्यापार दृष्टिकोण की आलोचना करने वाले टीवी विज्ञापन चलाए गए।

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 20, 2026 19:51 IST

वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय इस समय उस आपातकालीन कानून की समीक्षा कर रहा है, जिसके आधार पर ट्रंप ने दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाए हैं। यह कानून वर्ष 1977 का है और इसका नाम अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम है।

यदि सर्वोच्च न्यायालय इन टैरिफ को अवैध घोषित कर देता है तो भी ट्रंप प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने एक साक्षात्कार में कहा है कि अगर अदालत सरकार के पक्ष में फैसला नहीं देती तो राष्ट्रपति ट्रंप किसी दूसरे कानूनी रास्ते से नए टैरिफ लागू कर देंगे। उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन अगले ही दिन से नए टैरिफ लगाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

ग्रीर के अनुसार, ट्रंप को अपने कार्यकाल की शुरुआत में कई कानूनी विकल्प दिए गए थे और वे दूसरे कानूनों के तहत भी टैरिफ लगाने की क्षमता रखते हैं। उनका कहना है कि सच्चाई यह है कि आने वाले समय में भी ट्रंप की व्यापार नीति में टैरिफ एक अहम हिस्सा बने रहेंगे।

पिछले एक साल से सर्वोच्च न्यायालय इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या राष्ट्रपति का विदेशी व्यापार साझेदारों पर टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करना कानूनी है या नहीं। ट्रंप का कहना है कि वे व्यापार घाटे को कम करने, अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और अमेरिका के हितों से जुड़े वैश्विक मुद्दों से निपटने के लिए इन टैरिफ को जरूरी मानते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप अन्य मजबूत टैरिफ कानूनों का भी सहारा ले सकते हैं, जिनके तहत कुछ खास उत्पादों या कुछ देशों के निर्यात पर शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि इन कानूनों में आमतौर पर जांच, रिपोर्ट तैयार करने या आर्थिक अथवा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ठोस कारण दिखाने की जरूरत होती है। इससे राष्ट्रपति को मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने में पहले के मुकाबले कम स्वतंत्रता मिलेगी।

उदाहरण के तौर पर ट्रंप ने कनाडा पर इसलिए टैरिफ लगाने की धमकी दी है क्योंकि वहां उनके व्यापार दृष्टिकोण की आलोचना करने वाले टीवी विज्ञापन चलाए गए। इसके अलावा ब्राज़ील के निर्यात पर भी टैरिफ लगाए गए हैं क्योंकि वहां के पूर्व राष्ट्रपति जाइर बोल्सोनारो के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिन्हें ट्रंप अपना राजनीतिक सहयोगी मानते हैं।

जैमीसन ग्रीर ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास सेक्शन 301 जैसे विकल्प हैं, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में चीन के निर्यात पर टैरिफ लगाने के लिए किया था। यह प्रावधान कई कानूनी चुनौतियों के बावजूद प्रभावी रहा। इसके अलावा राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सेक्शन 232, भुगतान संतुलन से संबंधित सेक्शन 122 और सेक्शन 338 के तहत भी टैरिफ लगा सकते हैं। सेक्शन 338 के तहत अमेरिका उस स्थिति में कार्रवाई कर सकता है, जब कोई देश अमेरिका के साथ विशेष रूप से भेदभाव करता है।

इस बीच, ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की ट्रंप की धमकियों की ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे पूरी तरह गलत बताया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर जारी बयान में कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा है और उसका भविष्य ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क को ही तय करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पूरे नाटो गठबंधन के लिए चिंता का विषय है और सभी सदस्य देशों को मिलकर रूस से उत्पन्न खतरों का सामना करना चाहिए।

अमेरिका में चाहे सर्वोच्च न्यायालय कोई भी फैसला दे, ट्रंप प्रशासन टैरिफ को अपनी व्यापार नीति का अहम हिस्सा बनाए रखने के लिए हर कानूनी रास्ता अपनाने के लिए तैयार है।

Prev Article
काबुल में चीनी नागरिकों को निशाना बनाकर होटल में विस्फोट, कई लोगों की मौत
Next Article
ग्रीनलैंड के बाद ट्रंप की नजर डिएगो गार्सिया पर: हिंद महासागर में अमेरिका की चाल, भारत के लिए खतरे की घंटी

Articles you may like: