नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा चलाई जा रही महिला सुरक्षा योजनाओं की तीसरी पार्टी मूल्यांकन रिपोर्ट्स, जो नीति आयोग द्वारा तैयार की गई हैं, सार्वजनिक डोमेन में रखी जानी चाहिए। आयोग ने यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और जनता में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उठाया है। सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने हाल ही में एक आरटीआई याचिका की सुनवाई में यह टिप्पणी की। याचिका में वन-स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी योजनाओं के कार्यान्वयन और नीति आयोग द्वारा किए गए मूल्यांकन के रिकॉर्ड मांगे गए थे।
C IC ने कहा कि नीति आयोग की ये रिपोर्ट्स स्वतंत्र और तथ्य-आधारित हैं, जिनका उद्देश्य नीतियों में सुधार, मध्यवर्ती संशोधन और बेहतर शासन को सुनिश्चित करना है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये रिपोर्ट्स वस्तुनिष्ठ जांच पर आधारित हैं और इन्हें गोपनीय रखना उचित नहीं है। हालांकि, मंत्रालय ने यह तर्क दिया कि लगभग 1,870 पन्नों की फाइल नोटिंग उपलब्ध कराना संसाधनों पर बोझ डाल सकता है। CIC ने इसे स्वीकार किया लेकिन यह भी कहा कि मूल्यांकन रिपोर्ट्स को स्वेच्छा से साझा करना चाहिए।
आयोग ने MWCD को यह भी सलाह दी कि वह अपनी वेबसाइट पर अधिकतम जानकारी स्वयं सार्वजनिक करे। इसमें ठेके का नाम, राशि, काम की अवधि, कार्य का दायरा और समय-समय पर प्रगति शामिल हो। CIC के अनुसार, ऐसा करने से जवाबदेही बढ़ेगी और महिला सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता पर जनता को भरोसेमंद जानकारी मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि नीति आयोग की रिपोर्ट्स को सार्वजनिक करने से न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी, बल्कि महिला सुरक्षा और कल्याण की नीतियों को और बेहतर बनाने में मदद भी मिलेगी।