नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बुधवार को कहा कि एक शुद्ध और कानूनी मतदाता सूची ही लोकतंत्र को मजबूत करती है। उन्होंने यह बात अंतरराष्ट्रीय चुनाव प्रबंधन संगोष्ठी (IICDEM-2026) के उद्घाटन सत्र में कही। ज्ञानेश कुमार ने बिहार में पिछले साल हुए विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का उदाहरण देते हुए बताया कि इस प्रक्रिया में न तो किसी मतदाता के शामिल या बहिष्कृत होने पर कोई शिकायत आई और न ही एक भी मतदान दोबारा कराया गया। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार प्रत्येक मतदाता को सूची में शामिल करना और किसी को अनाधिकृत रूप से बहिष्कृत न करना ही लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। सभी चुनाव इसी सूची के आधार पर संपन्न होंगे।
विशेष गहन पुनरीक्षण: उद्देश्य और प्रक्रिया
SIR का मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची से हटाना है। बिहार और अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया कड़ी सार्वजनिक निगरानी में संपन्न हुई। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 4 नवंबर से अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में SIR का दूसरा चरण शुरू हुआ। असम में भी अलग विशेष पुनरीक्षण चल रहा है। अधिकांश राज्यों में अंतिम SIR 2002-2004 के बीच संपन्न हुई थी। इस कदम की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कई राज्यों में अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई भी की जा रही है।
चुनाव आयोग और नागरिक विश्वास
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कहा कि नागरिकों का चुनाव प्रबंधन संस्थाओं में विश्वास अमूल्य है। उन्होंने जोर दिया कि हर चुनाव के केंद्र में नागरिक हैं और उनकी पसंद का सम्मान होना आयोग की जिम्मेदारी है।
चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने बताया कि IICDEM-2026 में लगभग 70 देशों के 100 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। यह भारत में अब तक का सबसे बड़ा लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन सम्मेलन है, जो शोधकर्ताओं, छात्रों और प्रैक्टिशनरों को चुनावों के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा करने का मंच देता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने यह साबित किया कि सटीक और पारदर्शी मतदाता सूची ही लोकतंत्र की नींव मजबूत करती है। CEC कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी चुनाव आयोग की निगरानी में निष्पक्ष और दक्षता के साथ संपन्न हुए, जो नागरिकों के भरोसे को और मजबूत बनाते हैं।