कोलकाता : कोलकाता पुस्तक मेला परिसर में वाणी प्रकाशन के साहित्य घर, स्टॉल संख्या 381 पर हिंदी भाषा, साहित्य और रोजगार की संभावनाओं को लेकर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा तथा काव्यपाठ का आयोजन किया गया। “हिंदी पुस्तकें, तकनीक और रोजगार” विषय पर आयोजित इस सत्र में वक्ताओं ने बदलते समय में हिंदी की प्रासंगिकता और उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए कोल इंडिया के राजभाषा अधिकारी राजेश कुमार साव ने कहा कि आज के डिजिटल युग में सूचनाओं की अधिकता के कारण गंभीर अध्ययन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने हिंदी के विद्यार्थियों को परंपरागत अध्ययन के साथ-साथ सिनेमा, कंटेंट राइटिंग, टाइपिंग और अन्य तकनीक-आधारित क्षेत्रों में दक्षता हासिल करने की सलाह दी। वहीं पावर ग्रिड हिंदी अधिकारी मंजय साव ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में हिंदी शब्दावली के विस्तार से रोजगार की नई संभावनाएं सृजित हो सकती हैं।
विशिष्ट अतिथि ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी केवल अभिव्यक्ति की भाषा नहीं बल्कि आजीविका का मजबूत माध्यम भी बन सकती है। कार्यक्रम के माॅडरेटर उत्तम कुमार ने कहा कि हिंदी पुस्तकों के अध्ययन के साथ तकनीकी ज्ञान का समन्वय ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इसके बाद साहित्य घर में आयोजित काव्यपाठ सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक शंभुनाथ ने की। उन्होंने कहा कि कवि समाज के अंधकार में प्रकाश की किरण पैदा करता है और उसकी आवाज परिवर्तन का आधार बन सकती है। उन्होंने इस आयोजन को कोलकाता पुस्तक मेले में हिंदी की सशक्त उपस्थिति बताया। काव्यपाठ में ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, शिप्रा मिश्रा, संगीता व्यास, शिव प्रकाश दास, श्वेतांक सिंह, श्रद्धा टिबडेवाल, दीपश्री दास, सुमिता गुप्ता, पालीरानी राउत, हंसराज, अजय पोद्दार, मो. नेशार अहमद, अपराजिता वाल्मीकि, फरहान अज़ीज तथा अनूप प्रसाद ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
सत्र का संचालन प्रो. संजय जायसवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि बंगाल में हिंदी साहित्य की एक सुदीर्घ और समृद्ध परंपरा रही है जिसे आज के युवा रचनाकार नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।