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भारत-रूस सांस्कृतिक सेतु बने चित्रकार किंगशुक सरकार

रूस की स्टॉल पर लेखकों और कवियों के पोर्ट्रेट बने आकर्षण, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कलाकार की अनूठी प्रदर्शनी।

By रजनीश प्रसाद

Jan 31, 2026 07:21 IST

कोलकाता : अतंरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में रूस की स्टॉल पर इस वर्ष एक विशेष आकर्षण देखने को मिला, जहां प्रसिद्ध चित्रकार किंगशुक सरकार अपनी अनूठी चित्रकला का प्रदर्शन कर रहे हैं। किंगशुक सरकार न केवल एक चित्रकार हैं बल्कि रशियन क्लासिक लिटरेचर पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक नाटकों से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की है।

किंगशुक सरकार ने बातचीत में बताया कि उनका रूस से संबंध बचपन में ही बन गया था जब वे एक बार रूसी दूतावास गए थे और वहां आयोजित एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उसी समय से रूसी दूतावास से उनकी मित्रता शुरू हुई जो आगे चलकर सांस्कृतिक सहयोग में बदल गई। बच्चों की पुस्तकों से जुड़े कार्य के बाद जब वे पूर्ण रूप से पेशेवर कलाकार बने तब उन्हें वर्ष 2010 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद रूसी सरकार ने भी उनके कला योगदान को सराहा और कोलकाता के गॉर्कि सदन बालिगंज स्थित रूसी सांस्कृतिक केंद्र में उन्हें आमंत्रित किया।

वर्ष 2010 से अब तक किंगशुक सरकार भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों के लिए निरंतर समर्पित हैं। वे हर साल एक या दो बार रूस जाते हैं और वहां के लेखकों, कवियों, दार्शनिकों तथा स्क्रिप्ट राइटर्स के पोर्ट्रेट बनाते हैं। इस वर्ष रूस स्टॉल पर वे एक प्रसिद्ध रूसी लेखक की जयंती के अवसर पर उनकी स्मृति में एक्रेलिक ऑन कैनवास पोर्ट्रेट बना रहे हैं। यह चित्र पूर्ण होने के बाद गॉर्कि सदन को भेंट किया जाएगा और फिर रूसी सांस्कृतिक सदन में प्रदर्शित किया जाएगा।

किंगशुक सरकार की यह कला प्रदर्शनी भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करती नजर आ रही है।

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