कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला में स्थित एसबीआई सभागार में शनिवार, 31 जनवरी 2026 को दोपहर एक घण्टे का ‘आध्यात्मिक यात्राः एशिया भर में मान्यताएं और त्यौहार’ विषयक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में त्रिदिव कुमार चटर्जी, अनिता बोस और अरिजीत चक्रवर्ती ने एशिया के विभिन्न देशों में व्याप्त आध्यात्मिक परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और त्योहारों पर गहन चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत त्रिदिव कुमार चटर्जी ने की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत वर्ष 1976 में मात्र 32 प्रकाशकों के सहयोग से हुई थी। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेला केवल प्रकाशकों से नहीं बल्कि पाठकों से जीवित रहता है। यदि पाठक वर्ग नहीं होता तो इतने बड़े आयोजन की कल्पना संभव नहीं थी।
इसके बाद अनिता बोस ने विषय वस्तु पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि उत्सव और अनुष्ठान किसी भी समाज की आत्मा होते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद पुस्तक मेला एक बड़े सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है जिसमें पूरे प्रदेश के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। उन्होंने थाईलैंड, वियतनाम और जापान के उदाहरण देते हुए बताया कि वहां की पंचांग परंपराएं, संक्रांति, गणेश पूजा और भगवान जगन्नाथ की आराधना भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई हैं। थाईलैंड के राजपरिवार में आज भी ब्राह्मण परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बिहार और बंगाल, विशेषकर भागलपुर से गए ब्राह्मणों की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने विश्व के सबसे बड़े हिंदू मंदिर और वियतनाम में स्थित अनेक प्राचीन मंदिरों का भी उल्लेख किया।
अरिजीत चक्रवर्ती ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण, सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म प्रसार और जापान सहित एशिया में भारतीय आध्यात्मिक प्रभाव पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वक्ताओं की गहन चर्चाओं से उपस्थित दर्शक और छात्र न केवल जानकारी से समृद्ध हुए, बल्कि भारतीय संस्कृति की वैश्विक उपस्थिति पर गौरवान्वित भी महसूस किया।