केप कैनावेरल (अमेरिका): नासा का बहुप्रतीक्षित मानवयुक्त चंद्रमा मिशन अब कम से कम मार्च तक टाल दिया गया है। इसका कारण विशाल नए रॉकेट में ईंधन भरने के दौरान हाइड्रोजन गैस का रिसाव पाया जाना है। यह समस्या रॉकेट की अंतिम अभ्यास उड़ान यानी ड्रेस रिहर्सल के समय सामने आई।
यह वही समस्या है, जिसकी वजह से तीन साल पहले स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट की पहली उड़ान भी टल गई थी। उस समय भी हाइड्रोजन रिसाव के कारण पहला परीक्षण महीनों तक रोकना पड़ा था।
नासा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह घोषणा फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर में हुए अहम ईंधन परीक्षण के खत्म होने के बाद की गई। इन रिसावों से पहले नासा की योजना थी कि यह मिशन इसी सप्ताह के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है। यह पिछले पचास से अधिक वर्षों में इंसानों की चंद्रमा की पहली यात्रा होती। नासा के नए प्रशासक जैरेड आइज़ैकमैन ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा, “हमेशा की तरह सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हम तभी लॉन्च करेंगे जब हमें पूरा भरोसा होगा कि हम इस ऐतिहासिक मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
नासा के अधिकारियों ने बताया कि लगभग एक महीने की देरी से लॉन्च टीम को एक और ईंधन परीक्षण करने का समय मिलेगा। इसके बाद ही चार अंतरिक्ष यात्रियों- तीन अमेरिकी और एक कनाडाई को चंद्रमा के चारों ओर उड़ान पर भेजने का अंतिम फैसला लिया जाएगा।
हाइड्रोजन का रिसाव सोमवार को ईंधन भरने की प्रक्रिया की शुरुआत में ही सामने आ गया था और कुछ घंटे बाद फिर से हुआ। आखिरकार उलटी गिनती यानी काउंटडाउन को पाँच मिनट के स्तर पर ही रोकना पड़ा। लॉन्च नियंत्रक काउंटडाउन को 30 सेकंड तक ले जाना चाहते थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।
नासा ने कई बार हाइड्रोजन की आपूर्ति रोककर रॉकेट और ईंधन लाइनों के बीच के हिस्से को गर्म करने की कोशिश की ताकि अगर कहीं सील ढीली हो तो वह ठीक हो जाए। इसके अलावा हाइड्रोजन के प्रवाह में भी बदलाव किए गए। हालांकि ये उपाय काम नहीं आए। यही बदलाव 2022 में पहले SLS रॉकेट को बिना चालक दल के सफलतापूर्वक लॉन्च करने में मददगार साबित हुए थे।
अब जब लॉन्च कम से कम 6 मार्च तक टल गया है। मिशन के कमांडर रीड वाइज़मैन और उनके साथियों को ह्यूस्टन में चल रहे क्वारंटीन से बाहर आने की अनुमति दे दी गई है। अगली लॉन्च कोशिश से दो हफ्ते पहले वे फिर से क्वारंटीन में जाएंगे।
नासा के पास हर महीने केवल कुछ ही दिन होते हैं, जब वह अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर भेज सकता है। यह 1972 के बाद पहली बार होगा, जब इंसान चंद्रमा के पास उड़ान भरेगा।
यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री न तो चंद्रमा पर उतरेंगे और न ही उसकी कक्षा में प्रवेश करेंगे। वे केवल चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेंगे और जीवन समर्थन प्रणाली सहित कैप्सूल के अन्य महत्वपूर्ण सिस्टमों की जाँच करेंगे। यह तैयारी भविष्य में होने वाली चंद्रमा लैंडिंग के लिए की जा रही है।
1960 और 1970 के दशक में अपोलो कार्यक्रम के तहत नासा ने 24 अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा भेजा था। नया आर्टेमिस कार्यक्रम इससे आगे बढ़ते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में जाने का लक्ष्य रखता है और चंद्र सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को अधिक लंबे समय तक ठहराने की योजना पर काम कर रहा है।