यरुशलमः इज़राइल के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित तौर पर कोई डील है। एफबीआई की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जेफ़्री एपस्टीन से जुड़ी हाल ही में प्रकाशित फ़ाइलों में ऐसा दावा किया गया है। उन दस्तावेज़ों में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इज़राइल से प्रभावित हैं।
फ़िलिस्तीन या लेबनान में इज़राइली हमलों को लेकर ट्रंप की सहमति की बात अब किसी से छिपी नहीं है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनका संबंध भी लंबे समय से मित्रतापूर्ण रहा है। लेकिन इज़राइल के साथ उनकी कथित गुप्त सहमति को लेकर एपस्टीन फ़ाइल में किया गया यह दावा एक बार फिर सनसनी फैलाने वाला साबित हुआ है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को न्याय विभाग ने एपस्टीन के उपकरणों से ज़ब्त किए गए हज़ारों वीडियो, तस्वीरें और 30 लाख से अधिक फ़ाइलें सार्वजनिक कीं। उन्हीं में ये दस्तावेज़ शामिल बताए जा रहे हैं।
नए प्रकाशित दस्तावेज़ों में ट्रंप के व्यावसायिक लेन-देन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसी संदर्भ में बेवर्ली हिल्स की एक हवेली की ख़रीद-बिक्री का ज़िक्र किया गया है। यह मामला 2008 का है। ट्रंप ने 41 मिलियन डॉलर में एक संपत्ति खरीदी और बाद में उसे 95 मिलियन डॉलर में एक शेल कंपनी को बेच दिया। फ़ाइल में दावा किया गया है कि यह लेन-देन असामान्य और संदिग्ध था और यह अन्य अपारदर्शी वित्तीय सौदों की कड़ी का हिस्सा हो सकता है।
एपस्टीन से जुड़ी नवीनतम फ़ाइलों में ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति के दैनिक कामकाज पर कुश्नर का प्रभाव अत्यधिक था। उनके खिलाफ रूस की कई व्यावसायिक संस्थाओं से धन लेने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुश्नर के परिवार के अति-ज़ायोनिस्ट चाबाड नेटवर्क से संबंध हैं। चाबाड मूल रूप से एक अंतरराष्ट्रीय यहूदी संगठन है, हालांकि इसकी गतिविधियाँ मुख्य रूप से अमेरिका से संचालित होती हैं। इस संगठन पर कई बार राजनीतिक प्रभाव डालने के आरोप लगते रहे हैं। राजनीतिक हस्तियों के साथ चाबाड की नज़दीकियों की चर्चा भी आम है। यहां तक कि ट्रंप परिवार के साथ भी उनकी घनिष्ठता होने की बातें कही जाती रही हैं।
रिपोर्ट में कुश्नर के अतीत को भी खंगाला गया है, जिसमें उल्लेख है कि उनके पिता एक समय वित्तीय अपराधों में दोषी ठहराए गए थे। ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए उन्हें माफ़ी दे दी गई थी, जिस पर अब एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि ये सभी बातें फिलहाल आरोपों के स्तर पर ही हैं। ट्रंप प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन अमेरिका की राजनीति में ज़बरदस्त हलचल मच गई है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सत्ता के गलियारों में पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।