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एक को बचाने की कोशिश में 9 वीं मंजिल की बालकनी से गिरकर तीन बहनों की मौत? गाजियाबाद मामले में सनसनीखेज मोड़

घटना के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी अरुण सिंह ने क्या बताया?

By अयंतिका साहा, Posted by: प्रियंका कानू

Feb 04, 2026 19:15 IST

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बहनों की रहस्यमय मौत के मामले में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है। घटना के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पूरी घटना उनके सामने घटी। वे कुछ कर पाते इससे पहले ही बुधवार की गहरी रात को 'इंडिया सिटी' के एक बहुमंजिला आवासीय भवन की नौवीं मंजिल से तीन बहनें गिरकर मौत के घाट उतर गईं। पुलिस ने बताया कि मृत तीन बहनों के नाम पाखी (12), प्राची (14) और विशिका (16) हैं। दूसरे फ्लैट की बालकनी में मौजूद अरुन सिंह नामक प्रत्यक्षदर्शी ने और बताया कि तीनों में से एक बहन बालकनी से कूदने की कोशिश कर रही थी। बाकी दो झटक कर उसे बचाने की कोशिश में एक साथ नीचे गिर गईं।

प्रत्यक्षदर्शी पड़ोसी ने बताया कि बुधवार रात लगभग दो बजे वह अपने घर की बालकनी में खड़े थे। तभी उन्होंने देखा कि पड़ोस के फ्लैट की रेलिंग से एक किशोरी कूदने की कोशिश कर रही है। दूसरी एक किशोरी ने उसे खींचकर नीचे लाया लेकिन थोड़ी ही देर बाद वह किशोरी फिर से रेलिंग पर चढ़ गई। तब एक और किशोरी ने उसे पकड़कर रोकने की कोशिश की। अरुण ने आगे बताया कि वह तुरंत पुलिस या एम्बुलेंस को फोन करने गए लेकिन उससे पहले ही तीन लड़कियां एक साथ नीचे गिर गईं। इस घटना ने इलाके में भारी सनसनी फैला दी है।

पुलिस ने घटनास्थल से एक डायरी और सुसाइड नोट बरामद किया। नोट डायरी में लिखा हुआ था कि जो कुछ भी लिखा है, वह सब सच है। 'आई एम रियली सॉरी पापा' लिखकर नोट के अंत में एक रोते हुए इमोजी भी बनाया गया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में अनुमान है कि तीन बहनें एक 'कोरियन लवर' नाम के ऑनलाइन गेम के प्रति गंभीर रूप से आदी हो गई थीं। उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया था। यहां तक कि वे अपने असली नाम के बजाय कोरियन नाम का इस्तेमाल करती थीं।

मृत तीन किशोरीयों के पिता चेतन कुमार ने बताया कि उनकी बेटियों को कोरियन संस्कृति का काफी शौक था। हाल ही में माता-पिता ने उनके मोबाइल फोन के उपयोग पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि इसी के कारण यह घटना हुई। पुलिस ने यह भी बताया कि घटना की रात तीनों किशोरियों ने बालकनी का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया था। आवाज सुनकर माता-पिता दरवाजा तोड़कर अंदर आ गए लेकिन तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था। प्रत्यक्षदर्शी अरुण का दावा है कि खबर देने के लगभग एक घंटे बाद एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंची। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सबसे पहले आत्महत्या की कोशिश किसने की थी।

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