वाराणसी: वाराणसी में मारा गया बनारसी यादव। पूर्वी उत्तर प्रदेश का आतंक और कुख्यात भाड़े का हत्यारा बनारसी यादव मंगलवार रात बनारस के चौबेपुर इलाके के बरियासनपुर रिंग रोड पर स्पेशल टास्क फोर्स के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
पुलिस के मुताबिक, बनारसी को कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया था लेकिन उसने एसटीएफ जवानों पर लगातार गोलियां बरसानी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल बनारसी को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल से दो अत्याधुनिक पिस्तौल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि बनारसी मोटी रकम लेकर हत्या करता था। कभी खुद हत्या करता था, तो कभी अपने गिरोह के सदस्यों से कराता था। उसके खिलाफ कम से कम 24 आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, अपहरण, रंगदारी और अवैध हथियारों का कारोबार शामिल है।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
अपर पुलिस अधीक्षक विनोद सिंह ने बताया कि एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बनारसी अपने साथियों के साथ वाराणसी-गाजीपुर रोड से भागने की कोशिश कर रहा है। इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव और इंस्पेक्टर अनिकुमार सिंह अपनी टीम के साथ बरियासनपुर रिंग रोड पर पहुंचे। पुलिस ने देखा कि बनारसी और उसके दो साथी एक मोटरसाइकिल पर आ रहे हैं।
पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया। बनारसी बाइक के पीछे बैठा था। बाइक चालक पुलिस को देखकर गाड़ी छोड़कर भाग गया। इसके बाद बनारसी को कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया लेकिन उसने दोनों हाथों में पिस्तौल लेकर पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के कारण दोनों पुलिस अधिकारी बाल-बाल बच गए। इसके बाद पुलिस की जवाबी फायरिंग में बनारसी घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बनारसी यादव कौन था?
बनारसी यादव गाजीपुर जिले के करंडा इलाके का रहने वाला था। उसके खिलाफ वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज थे। वह मुख्य रूप से भाड़े का हत्यारा था।
बनारसी की खासियत?
वह कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। दोनों हाथों से पिस्तौल और रिवॉल्वर चलाने में माहिर था और एक शार्प शूटर था। कुछ समय पहले तक पुलिस के पास उसकी कोई तस्वीर भी मौजूद नहीं थी, जिस वजह से वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
किस घटना के बाद पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी?
करीब पांच महीने पहले सारनाथ इलाके में जमीन के डेवलपर महेंद्र गौतम की हत्या कर दी गई थी। वाराणसी के रिंग रोड इलाके में 60 करोड़ रुपये की जमीन पर वह अपने बेटे अरिहंत के नाम से आवासीय परियोजना बना रहे थे। महेंद्र गौतम की हत्या के लिए बनारसी समेत तीन लोगों को 6 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। इस मामले में दो शूटरों समेत छह लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था लेकिन बनारसी फरार चल रहा था।