क्या आप इंट्रोवर्ट हैं या एक्स्ट्रोवर्ट? ये दोनों शब्द हम सभी के लिए लगभग परिचित हैं। कोई आसानी से अजनबी माहौल में घुल-मिल सकता है और इसका आनंद ले सकता है। अपने बारे में खुलकर बात कर सकता है। वहीं, कुछ लोग केवल अपने करीबी लोगों के साथ ही खुलकर बात करते हैं, समय बिताते हैं और आत्मीयता महसूस करते हैं। अजनबी या अपरिचित माहौल में उन्हें असहजता होती है। ऐसे व्यक्ति इंट्रोवर्ट के रूप में जाने जाते हैं। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नए प्रकार के व्यक्तित्व की चर्चा हो रही है, जिसे कुछ लोग ऑट्रोवर्ट (Otrovert) कह रहे हैं। सवाल यह है कि ऑट्रोवर्ट कौन हैं?
ऑट्रोवर्ट व्यक्तित्व क्या है?
ऑट्रोवर्ट उस व्यक्ति को कहते हैं जो अकेले रहने में सहज महसूस करता है। अपने जगत में रहना पसंद करता है लेकिन जरूरत पड़ने या परिस्थितियों के अनुसार किसी भी जगह घुल-मिल सकता है और एक्स्ट्रोवर्ट की तरह व्यवहार भी कर सकता है यानी वह पूरी तरह से इंट्रोवर्ट नहीं है और हमेशा एक्स्ट्रोवर्ट भी नहीं है। ऑट्रोवर्ट अपने साथ समय बिताना पसंद करते हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर अजनबियों के साथ बातचीत करने में उन्हें डर नहीं लगता। सरल शब्दों में कहें तो वे परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यक्तित्व को बदल सकते हैं।
ऑट्रोवर्ट व्यक्तित्व क्यों बढ़ रहा है?
वर्तमान समय में ऑट्रोवर्ट व्यक्तित्व के उदय के पीछे कई सामाजिक और मानसिक कारण हैं, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है। जैसा कि :-
डिजिटल जीवनशैली
सोशल मीडिया, ऑनलाइन मीटिंग, वर्क फ्रॉम होम, इन सब ने लोगों के सामाजिक व्यवहार में बड़े बदलाव लाए हैं। जरूरत पड़ने पर पूरे दिन अकेले रह सकते हैं और जब चाहें ऑनलाइन सक्रिय सामाजिक उपस्थिति दिखा सकते हैं। इस कारण कई लोग ऑट्रोवर्ट बन रहे हैं। जब मन होगा या जरूरत होगी, दूसरों से मिलेंगे; जब पसंद नहीं, अकेले रहेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
आज की पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझ रही है। हमेशा समाज के सामने परफेक्ट दिखने के दबाव से बाहर रहकर, अपनी तरीके से जीने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऑट्रोवर्ट जानते हैं कब सामाजिक होना है और कब खुद को समय देना है।
रिश्तों का प्रकार बदलना
ऐसे कई लोग हैं जो बहुत ज्यादा लोगों से दोस्ती नहीं रखते। वे अपने विचारों से मेल खाने वाले लोगों के साथ संबंध बनाना पसंद करते हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर सामाजिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बना सकते हैं। यही कारण है कि ऑट्रोवर्ट लोगों की संख्या बढ़ रही है।
ऑट्रोवर्ट होने के फायदे
ऑट्रोवर्ट आम तौर पर आत्मविश्लेषण में सक्षम, भावनाओं को नियंत्रित करने में निपुण और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में कुशल होते हैं। अकेले रहना उन्हें थकाता नहीं और लोगों से बातचीत भी उनके लिए बोझ नहीं है। आधुनिक जीवन की जटिलताओं और लचीलापन के साथ तालमेल बिठाने के लिए ऑट्रोवर्ट व्यक्तित्व आज और प्रासंगिक हो गया है। यह कोई कमजोरी नहीं बल्कि समय के साथ खुद को ढालने की एक नई ताकत है।