अचानक जल जाने या छाले पड़ने पर लोग जली हुई जगह पर बर्फ लगा लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। फफोले पड़ने के डर और जलन कम करने के लिए बर्फ रगड़ी जाती है लेकिन इससे कोई लाभ नहीं होता बल्कि समस्या और बढ़ जाती है।
जली हुई जगह पर बर्फ क्यों नहीं लगानी चाहिए?
आग से जली त्वचा पर बहुत से लोग बर्फ लगाते हैं, जिससे जलन कुछ देर के लिए कम हो जाती है लेकिन इस गलती से जली हुई जगह पर फ्रॉस्ट इंजरी हो सकती है। यानी घाव को सूखने में ज्यादा समय लग सकता है। कई बार त्वचा के अंदरूनी हिस्सों तक भी चोट फैल सकती है। ऐसे में जलन और बढ़ जाती है और घाव जल्दी ठीक नहीं होता।
जली हुई जगह पर बर्फ लगाने से उस हिस्से की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे घाव तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऑक्सीजन और पोषण की कमी के कारण घाव भरने में दिक्कत होती है। रक्त प्रवाह कम होने से कोशिकाएं दोबारा सक्रिय नहीं हो पातीं इसलिए घाव को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।
तो फिर क्या करें?
नल के नीचे जली हुई जगह को लगभग बीस मिनट तक रखें। बहते पानी में जले हुए हिस्से को धो लें। इसके बाद हवा में उस जगह को सूखने दें। जरूरत हो तो साफ कपड़े से हल्के हाथ से पोंछ सकते हैं लेकिन रगड़ें नहीं। अगर पानी से धोना संभव न हो तो ठंडे पानी के छींटे दें या गीले कपड़े से सेक करें। जली हुई जगह पर संक्रमण का खतरा रहता है इसलिए उस हिस्से को नॉन-एडहेसिव बैंडेज या साफ कपड़े से ढक दें। नियमित रूप से ड्रेसिंग करें, इससे घाव जल्दी सूखेगा। इसके अलावा, जलने के घाव को भरने वाला मरहम भी लगाया जा सकता है।