मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को द्वि-मासिक ब्याज दरों पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली यह समिति शुक्रवार सुबह अगले रेट निर्णय का ऐलान करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष फरवरी से RBI ने मुख्य शॉर्ट-टर्म लेंडिंग रेट (रेपो) में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। वर्तमान आर्थिक परिदृश्य-मुद्रास्फीति नियंत्रण में और विकास स्थिर-को देखते हुए, MPC शायद दरों को स्थिर रखे, हालांकि मामूली कटौती की संभावना भी बनी हुई है।
आर्थिक संकेत और नीति पर असर
SBI के अध्ययन के अनुसार, भारत-यूएस और भारत-ईयू व्यापार समझौते से भारत पर आयात शुल्क घटकर 18% रह गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा। इसके साथ ही, सरकारी बजट 2026 ने ढांचागत सुधार, पूंजीगत व्यय और रोजगार सृजन पर जोर दिया है। ऐसे में मौद्रिक नीति स्थिरता का संकेत देती है कि ब्याज दर स्थिर रह सकती है, जबकि तरलता प्रबंधन और बांड मार्केट स्थिरता पर ध्यान दिया जाएगा।
दर स्थिरता बनाम कटौती का विकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट में अब और कटौती की संभावना कम है। BofA ग्लोबल रिसर्च के अनुसार, दर-कटौती चक्र फिलहाल समाप्त हो चुका है। वहीं, Kotak Mahindra AMC और अन्य विश्लेषकों का मानना है कि विकास-मुद्रास्फीति संतुलन और पर्याप्त तरलता MPC को दर स्थिर रखने के लिए पर्याप्त आधार देता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सरकारी बजट में पूंजीगत व्यय बढ़ने से बाजार में निवेश बढ़ेगा, जिससे स्थिर ब्याज दर वातावरण घर खरीद और रियल एस्टेट विकास में मदद करेगा। यही कारण है कि MPC रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने की संभावना ज्यादा है, जबकि फॉरवर्ड गाइडेंस हल्का डोविश होगा, ताकि भविष्य में स्थिति के अनुसार समायोजन किया जा सके।
यह बैठक दिखाती है कि RBI अब विकास-मित्र नीतियों और मुद्रा स्थिरता के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हाल के व्यापार समझौते और बजट प्रोत्साहन के चलते, MPC को यह अवसर मिला है कि बाजार को भरोसा और स्थिरता मिले, जबकि उधारी लागत और मुद्रा जोखिम प्रबंधन भी संतुलित रहें।
RBI की इस बैठक का अर्थ सिर्फ रेट तय करना नहीं है, बल्कि बाजार भावना, तरलता प्रबंधन और वैश्विक-घरेलू आर्थिक संकेतों के बीच नीति का संतुलन बनाना भी है। यह निर्णय वित्तीय बाजार, बैंकों और निवेशकों के लिए अगले कुछ महीनों में निर्णायक साबित हो सकता है।