नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी स्टॉक एक्सचेंज NSE अपने लंबे समय से लंबित IPO की तैयारी के अंतिम चरण में है। बाजार सूत्रों के अनुसार, 6 फरवरी को NSE बोर्ड की बैठक में एक विशेष IPO कमेटी के गठन का प्रस्ताव रखा जाएगा। यह कमेटी लिस्टिंग प्रक्रिया का केंद्रीय नियंत्रण रखेगी और मर्चेंट बैंकर्स, लीगल सलाहकारों के चयन के मानदंड तय करेगी, ताकि ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जल्द से जल्द दाखिल किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि Sebi द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने के बाद NSE की लंबित लिस्टिंग अब वास्तविकता के काफी करीब है। यह मंजूरी उस लंबी प्रतीक्षा का अंत है जो 2016 से चल रही थी, जब पहली बार NSE ने लगभग ₹10,000 करोड़ की राशि जुटाने के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे।
संबंधित को-लोकेशन विवाद के कारण Sebi ने तब मंजूरी रोकी थी। इसमें कुछ ब्रोकर्स को ट्रेडिंग सिस्टम में प्राथमिकता देने का आरोप था। NSE ने ₹1,388 करोड़ का समझौता करके मामला सुलझाया और Sebi ने 2025 में इन-प्रिंसिपल मंजूरी दी, जिससे IPO की राह खुल गई।
विश्लेषकों का कहना है कि NSE IPO भारत की पूंजी बाजारों में सबसे बड़े IPO में शामिल होगा, और इसके बाजार पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद है। NSE के पास लगभग 1.77 लाख शेयरधारक हैं। इसका अनुमानित मूल्य ₹5 लाख करोड़ से अधिक है।
NSE के एमडी और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि NOC मिलने के बाद, DRHP दाखिल करने की प्रक्रिया अगले चार महीनों में शुरू होगी। IPO को बाजार में लाने में कुल सात से आठ महीने का समय लग सकता है। उनका मानना है कि यह कदम न केवल NSE की वित्तीय मजबूती को दर्शाएगा, बल्कि भारतीय पूंजी बाजारों में विश्वास और निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ाएगा।
विश्लेषक यह भी मानते हैं कि IPO की सफल लिस्टिंग से बाजार की तरलता बढ़ेगी। इसके साथ ही संस्थागत निवेशकों की रुचि बढ़ेगी और निफ्टी और सेंसेक्स पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।