नई दिल्ली : चांदी ने उम्मीद से भी तेज दौड़ लगाई। एक साल में निवेशकों की रिटर्न की राशि 340 प्रतिशत रही। उस दौड़ में कुछ हद तक ठहराव आया। एक ही दिन में चांदी की कीमत में 17 प्रतिशत की गिरावट हुई। शुक्रवार को इसके प्रभाव से सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की कीमत भी गिरी। निवेशकों के 23 प्रतिशत तक का निवेश गायब हो गया। दूसरी ओर सोने की कीमत में भी बड़ी गिरावट हुई। ग्लोबल मार्केट में सोने में निवेशकों का 7 प्रतिशत निवेश कम हो गया।
आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत एक झटके में प्रति औंस 120 डॉलर (3,93,936 रुपये/किलो) से गिरकर 97 डॉलर (3,18,378 रुपये/किलो) पर आ गई। दूसरी ओर पीले धातु (सोना) की कीमत प्रति औंस 5,608 डॉलर (1,84,064 रुपये/10 ग्राम) से गिरकर 5,016 डॉलर (1,64,623 रुपये/10 ग्राम) रह गई।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बिक्री दबाव लगातार जारी है। जिसके कारण दोनों धातुओं के और भी नीचे जाने का संदेह है।
गुरुवार को चांदी की कीमत देश के विभिन्न शहरों में प्रति किलो 4,25,000 रुपये थी। वहीं शुक्रवार को विभिन्न शहरों में यह कीमत लगभग 3.5 लाख रुपये रह गई। दूसरी ओर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सिल्वर फ्यूचर्स की कीमत 15 प्रतिशत घटकर 3,39,916 रुपये प्रति किलो हुई। जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
क्यों घट रही है सोना-चांदी की कीमत?
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे फेडरल रिजर्व के चेयर जेरोम पॉवेल को हटाएंगे। पॉवेल की जगह केविन वार्श को मनोनीत किया गया। इसके कारण फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्धारण में बदलाव हो सकता है। यह रिपोर्ट सामने आते ही डॉलर इंडेक्स तेजी से बढ़ने लगा। इससे कीमती धातुओं के बाजार में सेलिंग प्रेशर पैदा हुआ, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है।
क्या और घटेगी कीमत?
सोना-चांदी के बाजार को लेकर विभिन्न विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। सर्वोच्च स्तर से सोने की कीमत 7 प्रतिशत कम हुई है। लेकिन सोने की कीमत आगामी दिनों में बढ़ेगी, इस पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS आशावादी है। उनके अनुसार वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी तो सोने की कीमत फिर बढ़ेगी। ध्यान रखें सोने और डॉलर का रिश्ता व्युत्क्रमिक होता है। यानी डॉलर पर दबाव पड़ने पर सोने की कीमत फिर बढ़ सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने इस साल सोने की कीमत का टार्गेट प्रति औंस 6,200 डॉलर रखा है। इसी तरह डॉयचे बैंक और सोसाइटी जेनरल जैसी संस्थाओं के अनुसार सोने की कीमत इस साल प्रति औंस 6,000 डॉलर तक पहुंच सकती है।
चांदी की कीमत को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है। उनके अनुसार चांदी की कीमत पिछले एक साल में 340 प्रतिशत बढ़ी है। इसलिए यह अत्यधिक मूल्यांकन के स्तर पर पहुंच गई है। इसी कारण चांदी की कीमत आगामी दिनों में घट सकती है। इस विषय में JP मॉर्गन के पूर्व बाजार विशेषज्ञ मार्को कोलानोविक ने बताया कि चांदी की हाल की तेजी लंबे समय तक बनी रहने की संभावना नहीं है। इसकी वजह से निवेशक नुकसान झेल सकते हैं। यदि चांदी की दौड़ में गिरावट आई, तो इस साल ही धातु की कीमत 50 प्रतिशत तक गिर सकती है।
दूसरी ओर सिटी ग्रुप ने चांदी की दौड़ को लेकर आशावादी रुख अपनाया है। उनके अनुसार अगर चांदी का बाजार तेज रुझान अपनाता है, तो साल के अंत तक धातु की कीमत प्रति औंस 170 डॉलर तक पहुंच सकती है।
पिछले साल 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उनके राष्ट्रपति बनने के बाद भू-राजनीतिक समीकरण बदल गए। टैरिफ गेम के दबाव में वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों के लिए सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं ‘सेफ हेवन’ बन गई। इसके कारण निवेशकों को केवल एक साल में चांदी में 340 प्रतिशत का रिटर्न मिला। वहीं सोने में रिटर्न 89 प्रतिशत रहा।