नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में सरकार माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज यानी एमएसएमई सेक्टर को तेज और तुलनात्मक रूप से सस्ते ऋण की सुविधा देने के लिए नई पहल की घोषणा कर सकती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, GST, इनकम टैक्स रिटर्न और बैंकिंग डेटा का एक साथ उपयोग करते हुए एक डिजिटल सिस्टम तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे ऋण मंजूरी की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम किया जा सके।
इस विषय से जुड़े एक अधिकारी ने राष्ट्रीय समाचार माध्यम को बताया कि इस दिशा में चर्चा जारी है और एमएसएमई को सहायता देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। अधिकारी के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में एमएसएमई को ऋण प्राप्त करने में अक्सर काफी समय लग जाता है और कई मामलों में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से तेज और सरल ऋण मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार किया जा रहा है।
वर्तमान में एमएसएमई सेक्टर के लिए ऋण की ब्याज दर औसतन सालाना 8 से 18 प्रतिशत के बीच रहती है। इसके अलावा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया लंबी होने के कारण छोटे व्यवसायों के विस्तार में बाधा आती है। सरकार 2026 के बजट में ऐसे उपाय ला सकती है, जिससे क्रेडिट तक पहुंच तेज हो और ऋण की लागत भी कम की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, संभावित पहलों में डिजिटल लोन स्कोरिंग की व्यवस्था शामिल हो सकती है। इसके तहत GST, ITR और बैंकिंग डेटा को जोड़कर एक यूनिफाइड डिजिटल स्कोरिंग सिस्टम बनाया जा सकता है, जिससे कुछ मामलों में ऋण केवल कुछ ही दिनों में मंजूर हो सकेगा। इसके अलावा एमएसएमई के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम लाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसके तहत पहले की तरह लगभग 2 प्रतिशत तक ब्याज सहायता दी जा सकती है और ऋण सीमा भी बढ़ाई जा सकती है।
इसके साथ ही ऋण से जुड़े दस्तावेजीकरण को आसान बनाने की योजना है। आवश्यक कागजात की संख्या कम की जा सकती है और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है, ताकि उद्यमियों को तेजी से ऋण उपलब्ध हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि एमएसएमई सेक्टर में क्रेडिट एक्सेस अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई मामलों में बैंक उच्च गारंटी या अतिरिक्त सुरक्षा की मांग करते हैं और अनुमोदन प्रक्रिया भी लंबी होती है। यदि प्रस्तावित पहलें प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो ऋण लेना आसान होगा, लागत घटेगी और व्यवसाय विस्तार को गति मिलेगी। इसका सकारात्मक असर रोजगार सृजन और उत्पादन क्षेत्र पर भी देखने को मिल सकता है।