मुंबई : एलआईसी के एमडी दिनेश पंत ने कहा कि सरकार ने हाल ही में बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की घोषणा की है। इससे नियामकों को अधिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि बजट 2026 में बीमा क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। साथ ही हाल ही में कुछ नीतिगत बदलाव भी हुए हैं, जैसे जीएसटी में कमी और दिसंबर में पेश किया गया बीमा संशोधन बिल।
ये सभी कदम यह दर्शाते हैं कि सरकार बीमा क्षेत्र को आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। सरकार इसे भारत में सुरक्षा अंतर को पुरा करना भी जरूरी समझती है।
एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में पंत ने सरकार के ‘2047 तक सभी के लिए बीमा' के लक्ष्य को प्राप्त करने के निरंतर प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बजट और हाल की नीतिगत बदलाव सरकार के बीमा क्षेत्र पर विशेष ध्यान को दर्शाते हैं। जीएसटी में कमी और बीमा संशोधन बिल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रमुख सुधारों में जीएसटी में कमी, 100 प्रतिशत एफडीआई की स्वीकृति, नियामकों को अधिक अधिकार देना और बीमा कंपनियों के लिए न्यूनतम नेट वर्थ की आवश्यकता को कम करना शामिल है।
सरकार ने हाल ही में व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी 18 प्रतिशत से शून्य करने की घोषणा की, जो 22 सितंबर 2025 से प्रभावी है। अब सभी व्यक्तिगत जीवन बीमा (टर्म, यूएलआईपी, एन्डोवमेंट और स्वास्थ्य बीमा (इंडिविजुअल, फैमिली फ्लोटर, सीनियर सिटिजन) नीतियां जीएसटी से मुक्त हैं, जिससे बीमा कंपनियों को अधिक बचत ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इस कदम का उद्देश्य आम जनता के लिए जरूरी वित्तीय सुरक्षा को और किफायती बनाना है।
पंत ने कहा कि सरकार बीमा कंपनियों को खर्च के आवंटन पर पुनर्विचार करने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी प्रेरित कर रही है, खासकर वितरण लागत के मामले में। बजट 2026 में पूंजीगत व्यय बढ़ाए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसे 11.4 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ किया गया। पंत इसे पिछले साल 97 प्रतिशत कैपेक्स उपयोग को देखते हुए अर्थव्यवस्था और अवसंरचना विकास पर इसका बहुगुणक प्रभाव महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कैपेक्स बढ़ाने के बावजूद वित्तीय घाटे और उधारी स्तर को अच्छे तरीके से प्रबंधित किया है, जो वास्तव में सराहनीय है।
आर्थिक दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 26-27 के लिए जीडीपी विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 6.5 प्रतिशत से ऊपर है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक आर्थिक संकेतों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव और रुपये की कमजोरी देखी गई है।