मुंबईः गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने निवेशकों को उतार–चढ़ाव का पूरा अनुभव कराया। कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार ने न केवल नुकसान की भरपाई की बल्कि अंत में बढ़त के साथ बंद हुआ। इस पूरे बदलाव के केंद्र में इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 रहा, जिसने निवेशकों की धारणा को सहारा दिया।
सुबह 10:30 बजे तक हालात काफी कमजोर थे। सेंसेक्स 451 अंक और निफ्टी 126 अंक टूट चुका था। 11:30 बजे तक गिरावट कुछ कम हुई, लेकिन बाजार अभी भी दबाव में था। दोपहर 12:30 बजे तक सेंसेक्स 158 अंक और निफ्टी 45 अंक नीचे था।
हालांकि 1 बजे के आसपास तस्वीर बदलने लगी। दोनों बेंचमार्क अपने निचले स्तर से उबरकर पिछली क्लोजिंग के करीब पहुंच गए। इसके बाद खरीदारी तेज हुई और 3 बजे तक सेंसेक्स 311 अंक तथा निफ्टी 92 अंक ऊपर कारोबार करने लगे।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 222 अंक ऊपर 82,566 पर और निफ्टी50 76 अंक बढ़कर 25,419 पर बंद हुआ। इस बढ़त के साथ ही सप्ताह के पिछले तीन सत्रों में सेंसेक्स करीब 1.3 प्रतिशत और निफ्टी50 लगभग 1.5 प्रतिशत मजबूत हो चुका है।
हालांकि, यह मजबूती पूरे बाजार में समान नहीं रही। जहां बेंचमार्क इंडेक्स ने शानदार रिकवरी दिखाई, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर पीछे रह गए। BSE मिडकैप 150 इंडेक्स मामूली 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े शेयरों में ही भरोसा दिखा रहे हैं।
सेक्टोरल स्तर पर भी मिला-जुला रुझान देखने को मिला। निफ्टी में मेटल, एनर्जी, कमोडिटीज, कैपिटल मार्केट, ऑयल एंड गैस, बैंक और रियल्टी जैसे सेक्टरों में अच्छी खरीदारी रही। दूसरी ओर आईटी, फार्मा, एफएमसीजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर दबाव में रहे, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक ग्रोथ और वैल्यू आधारित सेक्टरों की ओर झुक रहे हैं।
इकोनॉमिक सर्वे बना टर्निंग पॉइंट
बाजार की दिशा बदलने में सबसे बड़ी भूमिका इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि FY26 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जबकि FY27 में GDP ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। रिपोर्ट ने देश की आर्थिक बुनियाद को मजबूत बताते हुए लंबी अवधि को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, वैश्विक बाजारों में इस समय भारी अस्थिरता है और जियोपॉलिटिकल तनाव भी बढ़ा हुआ है, जिसके चलते ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय बाजार दबाव में हैं। ऐसे माहौल में इकोनॉमिक सर्वे ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों को भरोसा दिया। भले ही अगले वित्त वर्ष में ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी हो, फिर भी भारत कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर स्थिति में रह सकता है।
गुरुवार का कारोबार यह साफ दिखाता है कि भारतीय शेयर बाजार अभी भी नीतिगत संकेतों और आर्थिक अनुमानों पर तेजी से प्रतिक्रिया करता है। ग्लोबल अनिश्चितता के बावजूद मजबूत फंडामेंटल्स और सकारात्मक आर्थिक संकेत बाजार को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी यह भी बताती है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और बड़े, मजबूत शेयरों को तरजीह दे रहे हैं।
(समाचार एई समय कहीं भी निवेश के लिए सलाह नहीं देता। शेयर बाजार या किसी भी क्षेत्र में निवेश और पूंजी लगाना जोखिमपूर्ण है। उसके पहले उचित अध्ययन और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर शिक्षा और जागरूकता के लिए प्रकाशित की गई है।)