नई दिल्ली : भारत के पूर्वी तट के गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन को लेकर रिलायंस और ओएनजीसी के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। इस समझौते की घोषणा के बाद ही बुधवार को दोनों कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन के शेयर एक समय पर 8 प्रतिशत से भी ज्यादा चढ़ गए।
कौन-सा समझौता, किस बारे में?
कंपनी सूत्रों के अनुसार रिलायंस और ONGC गहरे समुद्र के अपतटीय क्षेत्र ऑयल-गैस प्रोजेक्ट्स में रिसोर्स शेयरिंग यानी बुनियादी ढांचे को साझा करने को लेकर एक समझौते पर पहुंचे हैं। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य भारत के पूर्वी तट के महत्वपूर्ण क्षेत्रों—कृष्णा-गोदावरी बेसिन और अंडमान के अपतटीय क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की खोज करना है।
ONGC ने बताया है कि इस समझौते से गहरे समुद्र परियोजनाओं में लागत कम करने, काम की रफ्तार बढ़ाने और मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। खास तौर पर जटिल डीप-वॉटर परियोजनाओं के लिए इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
नए कानून के अनुरूप
ONGC ने यह भी कहा है कि यह समझौता पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा लाए गए ऑयलफील्ड्स (संशोधन) अधिनियम 2025 के अनुरूप है। इस कानून में पहली बार स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तेल और गैस की खोज करने वाली कंपनियां ऑनशोर और ऑफशोर—दोनों क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को साझा कर सकती हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य तेल क्षेत्रों के विकास में तेजी लाना, अनावश्यक खर्च घटाना और हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाना है।
कौन-कौन से संसाधन साझा किए जाएंगे?
ONGC के अनुसार इस संयुक्त पहल के तहत दोनों कंपनियां कई महत्वपूर्ण संसाधनों को साझा करेंगी, जिनमें शामिल हो सकते हैं—
ऑनशोर और ऑफशोर प्रोसेसिंग सुविधाएं
ड्रिलिंग रिग
मरीन वेसल
बिजली आपूर्ति प्रणाली
पाइपलाइन
लॉगिंग और वेल सर्विस
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी बुनियादी ढांचों को अलग-अलग विकसित करने के बजाय साझा रूप से इस्तेमाल करने से परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता काफी बढ़ेगी।
बाजार सकारात्मक क्यों है?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यह समझौता ONGC के लिए खास तौर पर अहम है क्योंकि गहरे समुद्र की परियोजनाओं में लागत बहुत अधिक होती है और जोखिम भी बड़ा होता है। रिलायंस के साथ बुनियादी ढांचा साझा करने से यह जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा।
वहीं दूसरी ओर इस समझौते के जरिये रिलायंस को पूर्वी तट पर अपनी ऑफशोर मौजूदगी और मजबूत करने का मौका मिलेगा। लंबी अवधि में यह सहयोग देश के तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। कुल मिलाकर बाजार इस समझौते को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम के तौर पर देख रहा है।
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