पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) पर लोकसभा में होने वाली बहस का जवाब देने से दूरी बनाई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस कदम के लिए विपक्षी सांसदों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि 40-50 विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के कक्ष में घुसकर “अनाप-शनाप” बातें की, जिस वजह से सरकार ने निर्णय लिया कि पीएम मोदी लोकसभा में बहस का हिस्सा न बनें।
रिजिजू ने बताया, “प्रधानमंत्री की उपस्थिति से पहले 40-50 विपक्षी सांसद स्पीकर के कक्ष में प्रवेश कर गए और वहां बेहद आक्रामक तरीके से बात की। हम समझ गए कि उन्हें किसी भी स्थिति में लड़ाई चाहिए थी, इसलिए हमने सोचा कि यह बेहतर होगा कि पीएम मोदी बहस का हिस्सा न बनें।”
केंद्रीय मंत्री का कहना था कि यदि प्रधानमंत्री लोकसभा में आते, तो यह स्थिति और भी तनावपूर्ण हो सकती थी। सरकार ने बहुमत होने के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने का विकल्प चुना और इस पर अधिक विवाद नहीं बढ़ाया।
विपक्षी आरोप और सरकार की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने यह आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में नहीं आए क्योंकि उन्हें राहुल गांधी के द्वारा चीन के साथ झड़पों के संदर्भ में उठाए गए सवालों का जवाब देने में परेशानी हो सकती थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवाणे की किताब का हवाला देते हुए यह सवाल उठाया था कि क्यों प्रधानमंत्री ने चीन के साथ सीमा पार झड़पों पर स्पष्ट बयान नहीं दिया।
भाजपा कार्यालय में एक प्रेस कॉनफ्रेंस में रिजिजू ने इस आरोप को सख्ती से नकारते हुए कहा, “हम किसी से नहीं डरते। हम सत्ता में हैं और हमारे पास बहुमत है। हम संसद में विरोधियों को दबा सकते थे, लेकिन हम लोकतांत्रिक तरीके से काम करना चाहते थे। इसीलिए हमने पहले कोशिश की थी कि हम विपक्ष से बातचीत करें और शांतिपूर्ण तरीके से स्थिति को सुलझाएं।”
रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष की आक्रामकता और सत्ता पक्ष के संयम ने ही प्रधानमंत्री की गैर-मौजूदगी को उचित ठहराया। उन्होंने कहा, “हमने महसूस किया कि विपक्ष लड़ाई की तलाश में था और यदि पीएम मोदी लोकसभा में आते, तो हालात और बिगड़ सकते थे। इसलिए हमने उनका लोकसभा में न आने का फैसला किया।”
बहुमत के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन
इस विवाद के बीच एक और दिलचस्प पहलू यह है कि सत्ताधारी भाजपा के पास लोकसभा में बहुमत था। इसके बावजूद, सरकार ने वॉयस वोट के माध्यम से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। रिजिजू ने यह बात साफ की कि सरकार ने अपनी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा और संवाद के सिद्धांत को प्राथमिकता दी।
केंद्र की ओर से यह बयान भी आया कि सरकार संघर्ष को बढ़ावा देने के बजाय संवाद को महत्व देती है। यह कदम विपक्ष के आक्रामकता के बावजूद सरकार द्वारा संतुलित और स्थिर दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश को दर्शाता है।
विपक्षी बयान और राजनीतिक संदेश
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि पीएम मोदी ने संसद से भागकर खुद को बचाने की कोशिश की। इस पर केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी "विवादों को जन्म देने और सुर्खियों में बने रहने के लिए बेतुकी बयानबाजी कर रहे हैं।" उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “कांग्रेस ने पिछले 60 सालों में देश को कमजोर किया है। अब लोग कांग्रेस पर विश्वास नहीं करेंगे।”