पटना: उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को अश्लील और दोहरे अर्थ वाले गानों के खिलाफ पूरे राज्य में सख्त अभियान चलाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गाने एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुके हैं, जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं और बच्चों की मानसिकता पर नकारात्मक असर डालते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की पहचान कभी भी अश्लीलता से नहीं रही है बल्कि इसकी जड़ें लोकसंस्कृति और पारिवारिक मूल्यों में हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे सम्राट चौधरी ने बताया कि होली जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक पर्व से पहले सभी जिलों की पुलिस को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान के तहत सार्वजनिक कार्यक्रमों, बसों, ट्रकों और ऑटो-रिक्शा में अश्लील और दोहरे अर्थ वाले गाने बजाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, ताकि त्योहारों का माहौल स्वस्थ और सुरक्षित बना रहे। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों की पुलिस को यह निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किए जाएं। इस संबंध में सभी अधिकारियों और जिलों के पुलिस प्रमुखों को सर्कुलर जारी कर दिया गया है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गाने बजने से महिलाओं को असहज महसूस करना पड़ता है, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार की लोक-संगीत परंपरा समाज को जोड़ने वाली रही है न कि अपमान और असहजता पैदा करने वाली। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यह मुद्दा वर्ष 2023 में बिहार विधानसभा में भी उठाया गया था। 1 मार्च 2023 को कांग्रेस विधायक प्रतिमा कुमारी ने सदन में अश्लील और दोहरे अर्थ वाले गानों पर रोक लगाने की मांग की थी। उस समय राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया था कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह अभियान न केवल कानून व्यवस्था से जुड़ा कदम है बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक मूल्यों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी माना जा रहा है।