नयी दिल्लीःप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के नौवें संस्करण में छात्रों को बोर्ड परीक्षा के तनाव से निपटने और जीवन कौशल विकसित करने के लिए रणनीति दी। मोदी ने कहा कि परीक्षा केवल अंकों की दौड़ नहीं हैं, बल्कि सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर हैं।
मोदी ने छात्रों से कहा कि पढ़ाई और जीवनशैली में सुधार के लिए सभी सुझाव सुने जा सकते हैं। लेकिन बदलाव केवल अपनी समझ और अनुभव से करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति की पढ़ाई की आदत अलग होती है – कोई सुबह पढ़ता है, कोई रात में। इसी पर ध्यान देकर, छात्र अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने अंक-भ्रम पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि समाज अक्सर सिर्फ परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक लाने वाले छात्र की तारीफ करता है। हालांकि समय के साथ यह सब भुला दिया जाता है। इसका संदेश स्पष्ट है कि केवल अंक पर ध्यान केंद्रित करने से सफलता की असली माप और जीवन में संतुलन नहीं मिल सकता।
मोदी ने शिक्षा के उद्देश्य को व्यापक रूप में समझाया। उन्होंने गेमिंग, कौशल विकास और जीवन-मूल्य पर जोर दिया। उनका कहना था कि गेमिंग को केवल मनोरंजन नहीं बल्कि मानसिक कौशल, गति और सतर्कता बढ़ाने वाला माध्यम समझना चाहिए। शिक्षा और जीवन कौशल का संतुलन ही छात्रों को दीर्घकालिक सफलता दिला सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, पीएम मोदी की यह अपील सिर्फ छात्रों को परीक्षा का दबाव कम करने के लिए नहीं है।यह अपील एक लंबी अवधि के लिए जीवन कौशल विकसित करने की भी रणनीति पेश करती है। यह संदेश शिक्षा को केवल पढ़ाई तक सीमित न मानने पर ही नहीं है। इसका उद्देश्य जीवन के अन्य आयामों जैसे निर्णय क्षमता, आत्म-नियंत्रण और समय प्रबंधन में सुधार करने का है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की सफलता भी इसी दृष्टिकोण को दर्शाती है। इस साल देशभर से 4.5 करोड़ से अधिक छात्रों ने पंजीकरण किया। पिछले वर्षों की तुलना में यह काफी बड़ा आंकड़ा है। इसका मतलब है कि युवा पीढ़ी न सिर्फ परीक्षा में, बल्कि समग्र विकास में भी प्रधानमंत्री की सलाह को गंभीरता से ले रही है।