नई दिल्लीः लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार को शुरू होते ही विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण बाधित हो गई और महज कुछ ही मिनटों के भीतर सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के माहौल में सदन चलाना संभव नहीं है।
सदन की बैठक शुरू होते ही कई विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। उनके हाथों में तख्तियां थीं और वे विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज करा रहे थे। लगातार शोर-शराबे के बीच स्पीकर ने कहा कि मौजूदा सत्र में अब तक 19 घंटे 13 मिनट का समय हंगामे की वजह से बर्बाद हो चुका है, जो संसद की गरिमा के खिलाफ है।
ओम बिरला ने सदस्यों को याद दिलाया कि जनता ने उन्हें अपनी समस्याएं उठाने के लिए चुना है, न कि नारे लगाने के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी से जुड़ा एक प्रश्न कार्यसूची में सूचीबद्ध है, लेकिन हंगामे के कारण उस पर चर्चा संभव नहीं हो पा रही।
दरअसल, लोकसभा में सोमवार दोपहर से ही लगातार व्यवधान देखने को मिल रहा है। यह स्थिति तब पैदा हुई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से जुड़े एक लेख का हवाला देने की अनुमति अध्यक्ष की ओर से नहीं दी गई। इस लेख में वर्ष 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष का उल्लेख है।
लगातार नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने विपक्षी सांसदों को चेतावनी भी दी कि वे ट्रेजरी बेंच की ओर न आएं। शोर कम न होने पर, बैठक शुरू होने के चार मिनट से भी कम समय में लोकसभा स्थगित कर दी गई।
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का असर गुरुवार को भी देखने को मिला था, जब प्रधानमंत्री के पारंपरिक जवाब के बिना ही लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया-जो संसदीय इतिहास में एक असाधारण घटना मानी जा रही है।