नयी दिल्लीः भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच कथित बैठक से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसी किसी भी तरह की बैठक हुई ही नहीं और संबंधित रिपोर्ट पूरी तरह “बिना आधार” है।
दरअसल, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले साल सितंबर की शुरुआत में अजीत डोभाल और मार्को रुबियो के बीच एक “निजी बैठक” हुई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता और वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल तक इंतजार करने को तैयार है। यह बैठक ऐसे समय होने का दावा किया गया, जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया। गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा, “ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। जिस अवधि का उल्लेख किया गया है, उस समय भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अमेरिका की यात्रा पर नहीं थे।”
इस बीच भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर अहम जानकारी भी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपसी टैरिफ में कटौती के फैसले के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद किया है। नए फैसले के तहत अब भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जो पहले 50 प्रतिशत था। सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत के निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी, घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
गौरतलब है कि इन दिनों विदेश मंत्री एस. जयशंकर वॉशिंगटन के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री से भी मुलाकात की है। जयशंकर ने इस बातचीत को “बेहद सकारात्मक और उपयोगी” बताया है। उन्होंने संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे औपचारिक रूप दिया जा सकता है।