नई दिल्लीः संसद के भीतर गतिरोध और बाहर सियासी गर्मी-शुक्रवार को संसद परिसर एक बार फिर विपक्षी विरोध का केंद्र बन गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को “ट्रैप डील” बताते हुए कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और केंद्र पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।
लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होते ही विपक्षी सांसद मकर द्वार के पास जमा हुए। हाथों में “Trap Deal” लिखा बैनर और जुबान पर “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे-माहौल पूरी तरह राजनीतिक टकराव का था। प्रदर्शन में प्रियंका गांधी वाड्रा, बजट सत्र के शेष हिस्से के लिए निलंबित सांसद और कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
विपक्ष का गुस्सा सिर्फ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं था। पूर्व थलसेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से जुड़े विवाद, राहुल गांधी को उससे जुड़ा लेख उद्धृत करने से रोके जाने और आठ सांसदों के निलंबन ने इस विरोध को और धार दी।
संसद परिसर से बाहर निकलते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा- “जो उचित समझो, वही करो।” कांग्रेस का आरोप है कि 2020 के भारत–चीन संघर्ष को लेकर सरकार जवाबदेही से बच रही है।
कांग्रेस के लोकसभा व्हिप मणिकम टैगोर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री संसद का सामना करने से कतरा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव में फैसले ले रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि संसद में आवाज दबाई जा रही है, जबकि सरकार लोकतांत्रिक मर्यादाओं की बात कर रही है।
गौरतलब है कि सोमवार से संसद में लगातार हंगामा जारी है। गुरुवार को प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होना भी विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। सत्र के बाकी दिन भी टकराव के संकेत दे रहे हैं।