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मेट्रो में आत्महत्या को रोकने के लिए किए गए कौन से उपाय? जवाब से संतुष्ट नहीं सांसद माला राय

संसद में पूछे गए 3 सवालों में से किसी भी सवाल का रेल मंत्रालय संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।

By Shyam Gopal Ray, Posted By : Moumita Bhattacharya

Feb 06, 2026 19:32 IST

कोलकाता मेट्रो के सबसे पुराने लाइन दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष (ब्लू लाइन) पर यात्रियों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए प्लेटफार्म पर स्क्रिन डोर लगाने को लेकर संसद में सवाल पूछे गए थे लेकिन...! संसद में पूछे गए 3 सवालों में से किसी भी सवाल का रेल मंत्रालय संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।

इस मुद्दे पर कोलकाता दक्षिण की सांसद माला राय ने सवाल पूछा था। माला राय का दावा है कि लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए रेल मंत्रालय ने 4 पन्नों का विश्लेषण जरूर किया है लेकिन काम कितना आगे बढ़ा है, इस काम के लिए आवंटित राशि और समय सीमा - इन तीनों सवालों का कोई उत्तर नहीं दिया गया है।

बुधवार को रेल मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि कोलकाता मेट्रो के स्टेशनों के प्लेटफार्म को चौड़ा बनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। सांसद का कहना है कि मेरा सवाल प्लेटफार्म के किनारों पर स्क्रिन डोर लगाने के काम कितना आगे बढ़ा है, को लेकर था न कि प्लेटफार्म के चौड़ीकरण को लेकर।

ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के हर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन वाला दरवाजा है। इस वजह से वहां सुसाइड करने का कोई तरीका नहीं है। वहीं दूसरी तरफ रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1984 से 2026 तक नॉर्थ-साउथ लाइन पर करीब 200 लोगों ने आत्महत्या की थी। इनमें से 7 आत्महत्या अकेले 2024 में कोलकाता मेट्रो की ब्लू लाइन पर हुए। उस साल देश के सभी जोन में रेलवे ट्रैक पर मरने वालों की संख्या 22,803 थी। यानी हर दिन औसतन 60 लोग।

कोलकाता मेट्रो के एक अधिकारी का कहना है कि अगर मेट्रो में कोई आत्महत्या होती है तो सेवाएं रुक जाती है। कई यात्रियों को दिक्कत होती है क्योंकि कई लोग अपने-अपने गंतव्यों तक जल्दी पहुंचने के लिए मेट्रो पर ही निर्भर रहता है। वहीं अगर सामान्य ट्रेन के ट्रैक पर कोई आत्महत्या करता है तो यात्री सेवाओं पर इसका असर नहीं पड़ता है। इस वजह से इसकी कोई चर्चा भी नहीं करता है।

इस बारे में कोलकाता मेट्रो रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एस.एस. कन्नन का कहना है कि हम भी मेट्रो में आत्महत्या की घटनाओं को लेकर चिंतित हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 40 साल से ज्यादा पुरानी ब्लू लाइन के प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन डोर लगाने में कई दिक्कतें हैं।

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