गुरुवार (5 फरवरी) को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अंतरिम बजट पेश किया जिसमें आशा कर्मियों का मासिक भत्ता ₹1000 बढ़ाने के साथ ही मातृत्व अवकाश की घोषणा और मृत आशा कर्मियों के परिवारों को 5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता देने की बात कही गयी है। लेकिन भत्ता बढ़ने से आशा कर्मी खुश नहीं हैं। शुक्रवार को आशा कर्मियों के संगठन के सदस्यों ने स्वास्थ्य भवन में अपना ज्ञापन सौंपा। उनके आंदोलन की वजह से स्वास्थ्य भवन परिसर का माहौल काफी तनाव पूर्ण बन गया था।
आशा कर्मियों की शिकायत है कि केंद्रीय बजट की तरह ही राज्य के बजट में भी उन्हें वंचित होना पड़ा है। मातृ्त्व अवकाश और मृत आशा कर्मियों के परिवारों को 5 लाख रुपया की सहायता राशि की घोषणा लंबे आंदोलन का ही नतीजा है। इस घोषणा से भले ही आशा कर्मी खुश हैं लेकिन वह सवाल उठा रहे हैं कि क्यों सरकार ने इन मामलों को लेकर पहले नहीं सोचा था? इसके साथ ही यह भी पूछा है कि केंद्र सरकार की ओर से कितना आवंटन मिल रहा है?
पश्चिम बंगाल आशा कर्मी यूनियन की राज्य सचिव इस्मत आरा खातून ने आरोप लगाते हुए कहा कि आशा कर्मियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन की वजह से राज्य के विभिन्न इलाकों में हमपर दबाव बनाया जा रहा है। इस तरह का व्यवहार तुरंत बंद कर देना होगा वरना भविष्य में और बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।
शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन के सामने राज्य के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे आशा कर्मी जमा हुए और विरोध-प्रदर्शन करना शुरू किया। विधाननगर पुलिस ने तुरंत स्वास्थ्य भवन से लगभग 100 मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। हालांकि आंदोलनरत आशा कर्मियों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश भी की जिसे लेकर पुलिस के साथ उनका विवाद पैदा हो गया।
आशा कर्मियों का दावा था कि स्वास्थ्य सचिव से मिलने के लिए पहले से अनुमति ली गयी थी। परिस्थिति को संभालने के लिए स्वास्थ्य भवन परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस को तैनात किया गया था।