SIR की सुनवाई की प्रक्रिया खत्म होने से पहले ही कम से कम 50,000 नामों को हटाने की EROs ने सिफारिश की। चुनाव आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इनमें से कोई भी सुनवाई में नहीं पहुंचा था। अलग-अलग जानकारियों के आधार पर चुनाव आयोग ने सीधे उनका नाम हटा दिया है।
आयोग ने राज्य भर में जिन अनमैप्ड मतदाताओं की संख्या जारी की थी वह 32 लाख के आसपास है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि सुनवाई का नोटिस भेजने के बावजूद करीब 10% मतदाता सुनवाई में नहीं पहुंचे। इसलिए अब मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की गयी है।
गुरुवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा था कि अनमैप्ड मतदाताओं की सूची में से जिन लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया गया था उनमें से कई के बारे में कोई जानकारी ही नहीं मिली है। हालांकि इसके बावजूद आयोग उन्हें ढूंढने की कोशिश कर रहा है। अलग-अलग जिलों के ERO से 50,000 नाम ऐसे सामने आए हैं जिनका कोई अता-पता नहीं मिल रहा है। इसलिए आयोग सीधे उनका नाम हटा दे रहा है।
दूसरी तरफ FRRO (Foreigners Regional Registration Office) को कई ऐसे बांग्लादेशी नागरिकों के बारे में जानकारी मिली है जो भारतीय पहचान पत्र के साथ गैर-कानूनी तरीके से यहां रह रहे हैं। वह सूची भी FRRO ने राज्य CEO के ऑफिस को भेज दी है। राज्य CEO के ऑफिस के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वह सूची 3,000 से ज्यादा लोगों की बन गई है।
चुनाव आयोग ने शुरू से ही भरोसा दिलाया है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा और किसी भी गैर-कानूनी वोटर का नाम सूची में नहीं रहेगा। इसलिए आयोग यह पक्का करने के बाद कि काटछांट के आखिरी चरण में कोई कमी न रह जाए निर्धारित समयसीमा के अंदर अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तैयारी कर रहा है।
चुनाव आयोग की रिपोर्ट :
गुरुवार तक 1 करोड़ 51 लाख 92 हजार 735 लोगों का नोटिस बनाया गया है। इनमें से सुनवाई के लिए 1 करोड़ 30 लाख मतदाता उपस्थित हुए हैं और अपलोड के बाद 80 लाख मतदाताओं का सत्यापन हो गया है।