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गिग वर्कर से लेकर खेतिहर मजदूर तक - बजट में ममता बनर्जी ने 'ग्राम-बांग्ला' पर दिया खास ध्यान

ममता बनर्जी ने वोटबैंक पर ज्यादा ध्यान न देकर हमेशा से ही आर्थिक रूप से पिछड़े 'बहुसंख्यक' जनता पर ही उन्होंने हमेशा से भरोसा किया है।

By Debdeep Chakraborty, Posted By : Moumita Bhattacharya

Feb 05, 2026 19:50 IST

गांव के पिछड़े हुए लोगों की नब्ज जानती हैं तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी। यहीं दावा करते हैं राजनैतिक विश्लेषक। यह बात जगजाहिर है कि वोटबैंक पर ज्यादा ध्यान न देकर हमेशा से ही आर्थिक रूप से पिछड़े 'बहुसंख्यक' जनता पर ही उन्होंने हमेशा से भरोसा किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 के चुनाव से ठीक पहले अंतरिम बजट पर अगर गौर किया जाए तो उनकी यहीं सोच इसमें झलकती दिखाई दे रही है। गिग वर्कर से लेकर दिहाड़ी मजदूरों तक की आर्थिक सहायता में वृद्धि का प्रस्ताव - ऐसे कई सेक्टर के बजट में आवंटन इसी बात को साबित कर रहा है।

गिग वर्कर को सामाजिक सुरक्षा

फूड डिलिवरी से लेकर दवाईयां, कन्ज्यूमर उत्पाद से लेकर सब्जियां तक डिलिवरी करने वाले गिग वर्कर की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो करीब 1 करोड़ 20 लाख से अधिक कर्मचारी इस वक्त देशभर में कार्यरत हैं। राज्य के मामले में दावा किया जाता है कि यह संख्या करीब 4 से 5 लाख है। इन गिग वर्कर्स को लेकर ही अब राज्य सरकार नयी सोच को अंजाम दे रही है।

बजट में बताया गया है कि गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा परियोजना के अधीन लाया जाएगा। जल्द ही असंगठित इन मजदूरों के लिए निश्चित पोर्टल शुरू की जाएगी। जब सभी कर्मचारी अपना रजिस्ट्रेशन करवा लेंगे तब धीरे-धीरे उन्हें सामाजिक सुरक्षा परियोजना के तहत लाया जाएगा। ऐसे मामले में स्वास्थ्य साथी समेत अन्य ऐसी परियोजनाएं जो खासतौर पर मजदूरों के लिए ही चलायी जाती हैं, उनकी सुविधाओं का भी लाभ उठा सकेंगे।

खेतिहर मजदूरों के लिए आर्थिक मदद

खेतिहर मजदूरों की आजीविका कृषि और उससे जुड़े कार्यों से ही चलती है। जिन खेतिहर मजदूरों के पास अपनी जमीन नहीं होने की वजह से उन्हें 'कृषक बंधु' परियोजना का लाभ नहीं मिलता है या जो किसान दूसरों के खेतों में फसल उपजाते हैं, उनके लिए आर्थिक मदद की घोषणा की गयी है। रवि और खरीफ फसलों के समय साल में दो बार ₹2000 यानी कुल ₹4000 की वित्तीय मदद की जाएगी। इनके लिए अलग से डाटाबेस बनाया जा रहा है।

छोटे किसानों को सिंचाई का शुल्क माफ

राज्य सरकार ने छोटे किसानों के लिए एक नयी घोषणा की है। सभी छोटे किसानों को जिन्हें सरकारी ट्यूबवेल अथवा नदी से सिंचाई के लिए शुल्क या चार्ज देना पड़ता था, उसे माफ करने का फैसला लिया गया है।

100 दिनों के काम की परियोजना

तृणमूल कांग्रेस पिछले लंबे समय से 100 दिनों के काम के लिए बकाया रुपया देने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रही है। जॉब कार्ड होल्डर के लिए राज्य सरकार ने 'कर्मश्री' परियोजना को शुरू किया था। राज्य की ओर से 100 दिनों के काम की मजदूरी प्रदान की जा रही है। हाल ही में MGNREGA परियोजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में इस परियोजना का नाम 'महात्माश्री' दिया गया है। इस साल न्यूनतम 100 दिनों का काम निश्चित करने के लिए ₹2000 करोड़ रुपया बजट आवंटित किया गया है।

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