नई दिल्ली: भारत के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अपनाने में तभी सफलता मिलेगी जब उन्हें सिर्फ एक बार का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि लगातार मार्गदर्शन और मदद मिले। यह बात नीति आयोग की डिस्टिंग्विश्ड फेलो देबजानी घोष ने ‘AI for All’ कॉन्फ्रेंस में कही।
उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक की जानकारी तो बढ़ी है, लेकिन बहुत से MSME के पास सही टूल्स, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सपोर्ट नहीं है। छोटे और माइक्रो बिजनेस को यह समझना मुश्किल होता है कि AI या डिजिटल तकनीक को अपने काम में कैसे लागू करें।
देबजानी घोष ने MSME को केवल अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही नहीं बल्कि लाखों लोगों के लिए “मोबिलिटी लैडर” भी बताया। उनका कहना था कि इस सेक्टर में उत्पादकता बढ़ाने से रोजगार, आय और आर्थिक लचीलापन सभी में सुधार हो सकता है।
उन्होंने CII की X-Edge पहल को इसका उदाहरण बताया। इस मॉडल में छात्रों को MSME के साथ जोड़कर ऑपरेशनल समस्याओं का समाधान और डिजिटल सुधार करने का मौका दिया जाता है। छात्रों को AICTE के माध्यम से अकादमिक क्रेडिट मिलता है, जबकि MSME को किफायती और भरोसेमंद डिजिटल सलाहकार मिलते हैं। घोष इसे एक “वर्चुअस साइकिल” कहती हैं, जो छात्रों, व्यवसायों और पूरे देश की अर्थव्यवस्था तीनों के लिए फायदेमंद है।
देबजानी घोष ने कहा कि AI सिर्फ टूल है, असर तब आएगा जब लोग इसे जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें। उन्होंने जोर दिया कि स्किलिंग और सतत मार्गदर्शन को भारत की AI रणनीति का केंद्र बनाना होगा। साथ ही सरकार, उद्योग, अकादमिया और स्टार्टअप्स को मिलकर काम करने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत में समावेशी विकास तभी संभव है जब हम सभी मिलकर एक टीम की तरह काम करें, जैसा कि ‘टीम इंडिया’ की भावना है।