नई दिल्ली: अब आम नागरिक भी साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ सरकार के अभियान का हिस्सा बन गए हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) ने संचार साथी पहल के तहत शुरू की गई ‘चक्षु’ सुविधा के जरिए लोगों को मौका दिया है कि वे संदिग्ध कॉल, मैसेज और फिशिंग लिंक की रिपोर्ट कर सकें। इसका असर तुरंत देखने को मिला है।
सरकार ने बताया कि नागरिकों से मिली रिपोर्ट के आधार पर अब तक 39.43 लाख मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट, 2.27 लाख मोबाइल हैंडसेट ब्लैकलिस्ट और 1.31 लाख एसएमएस टेम्पलेट्स ब्लॉक किए जा चुके हैं। अकेले 2025 में ही 5.19 लाख से ज्यादा रिपोर्ट दर्ज की गईं। सबसे ज्यादा फर्जी कस्टमर केयर कॉल, सरकारी एजेंसियों का प्रतिरूपण और निवेश-ट्रेडिंग फ्रॉड की शिकायतें आईं।
राज्यसभा में लिखित जवाब में संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर ने कहा कि चक्षु सुविधा उन मामलों के लिए है, जहां कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है। यदि नुकसान हुआ है, तो उसका निपटारा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) करता है।
विशेष रूप से, दूरसंचार विभाग ने डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) भी बनाया है। यह एक सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम है, जो सरकार, बैंक, पुलिस, मोबाइल कंपनियां और व्हाट्सऐप जैसे हितधारकों को जोड़ता है। अब तक इस प्लेटफॉर्म की मदद से 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी रोकी जा चुकी है। व्हाट्सऐप ने 28 लाख संदिग्ध अकाउंट्स को भी हटा दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि चक्षु और DIP जैसे प्लेटफॉर्म यह दिखाते हैं कि साइबर सुरक्षा अब सिर्फ सरकार का काम नहीं है। आम नागरिकों को इसमें शामिल करके धोखाधड़ी को पहले ही पकड़ा जा रहा है। इस तरह से डिजिटल अपराध रोकने की रणनीति अब ज्यादा असरदार और तेज हो गई है।