नई दिल्ली : वर्तमान उथल-पुथल भरे भू-राजनीतिक परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य है। इसी उद्देश्य से केंद्र ऊर्जा आपूर्ति स्रोतों को बहुआयामी बनाने की योजना बना रहा है। भविष्य में वैश्विक बाजार की अस्थिरता का असर देशवासियों के दैनिक जीवन पर न पड़े, इसके लिए यह कदम उठाया जा रहा है। बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह दावा किया।
इस दिन संसद में उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना ही राज्य की प्राथमिकता है। इसलिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना आवश्यक है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान के आधार पर नई दिल्ली तुरंत रूस से तेल खरीदना बंद करने वाली है या नहीं, इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और अमेरिका के बीच एक नए व्यापार समझौते की घोषणा करने वाले हैं। इस समझौते के तहत भारतीय अधिकांश उत्पादों पर आयात शुल्क दर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात ट्रम्प ने कही है। इसके बदले में उन्होंने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और संभवतः अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाएगा। हालांकि भारत ने अभी तक औपचारिक रूप से रूस से तेल खरीदना बंद करने की कोई घोषणा नहीं की है और गोयल ने भी संसद में इसे स्पष्ट नहीं किया।
दूसरी ओर भारत की तरफ से रूस से तेल खरीद बंद करने का कोई संदेश उन्हें नहीं दिया गया है, यह क्रेमलिन पहले ही बता चुका है। मास्को के अनुसार कई स्रोतों से तेल आयात की योजना नई नहीं है; भारत कई वर्षों से इस प्रक्रिया का पालन कर रहा है। यह योजना कोई नई रणनीति नहीं, बल्कि एक चल रही प्रक्रिया का हिस्सा मात्र है।
विश्लेषकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत और आपूर्ति सुरक्षा की चिंता और भू-राजनीतिक दबाव के कारण भारत ने रूस से तेल का आयात पहले ही काफी कम कर दिया है। लेकिन इसे अचानक पूरी तरह बंद करना यथार्थपरक नहीं है। ऐसी स्थिति में देश में ईंधन की कीमतें बढ़कर मुद्रास्फीति की स्थिति बढ़ा सकती हैं। इसलिए पहले से अनुबंधित रूस तेल का आयात जारी रखने के साथ-साथ नई दिल्ली नई भू-राजनीतिक परिस्थितियों में धीरे-धीरे विभिन्न स्रोतों से तेल आयात करेगी।