नई दिल्ली : इंडिगो की लंबी दूरी की उड़ानों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी कर कंपनी ने बताया कि 17 फरवरी से दिल्ली से डेनमार्क के कोपेनहेगन जाने वाली उड़ानें फिलहाल बंद रखी जाएंगी। 7 फरवरी से दिल्ली–मैनचेस्टर रूट की उड़ानों की संख्या भी कम की जा रही है। 9 फरवरी से दिल्ली–लंदन रूट की उड़ानों में भी कटौती शुरू होगी।
दो दिन पहले ही इंडिगो ने त्बिलिसी (जॉर्जिया), अल्माटी (कजाखस्तान), ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) और बाकू (अजरबैजान) जाने वाली सभी उड़ानें 11 फरवरी तक रद्द कर दी थीं। बताया गया था कि ईरान और अमेरिका के संबंधों के मद्देनजर किसी भी समय दोनों देशों के बीच संघर्ष की संभावना बन गई है। इस स्थिति में दुनिया की कई एयरलाइंस ईरान के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित नहीं मान रही हैं। इंडिगो ने बताया कि मजबूरी में उन्हें भी उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं। यहां तक कि कोपेनहेगन की उड़ान रद्द करने या मैनचेस्टर की उड़ानों में कटौती के पीछे भी इसी स्थिति का हवाला दिया गया है। कंपनी का तर्क है कि बार-बार रूट बदलने और लंबा चक्कर लगाकर उड़ान भरने के कारण उनके छह ड्रीमलाइनर विमानों का लाभकारी उपयोग संभव नहीं हो पा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग कह रहा है कि 10 फरवरी से पायलट और केबिन क्रू के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नए नियम लागू हो रहे हैं। इसके तहत पायलट और क्रू को अधिक आराम देना होगा। यह नियम पिछले नवंबर में लागू किया गया था, जिसके असर से दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो की बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने लगी थीं। मजबूर होकर केंद्र सरकार ने उस नए FDTL को वापस ले लिया था। तब ही कहा गया था कि तैयारी के लिए समय दिया जा रहा है और नया FDTL 10 फरवरी से लागू होगा।
विशेषज्ञों का दावा है कि इंडिगो प्रतिदिन कुल मिलाकर 2200 उड़ानों का संचालन करता है। नए FDTL के तहत इतनी संख्या में उड़ानें चलाना उनके लिए संभव नहीं है क्योंकि इसके लिए जितने पायलट और क्रू की जरूरत होगी, उतनी संख्या इंडिगो के पास नहीं है—ऐसा विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है। इसी कारण कंपनी अभी से उड़ानों में कटौती शुरू कर रही है।
दिसंबर में इंडिगो द्वारा इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द की गई है इस मामले में बुधवार को भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग ने नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। कारोबार में इंडिगो की अनैतिकता के आरोप सामने आए हैं। कहा गया है कि दिसंबर में बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द कर न केवल यात्रियों को परेशानी में डाला गया, बल्कि बाजार में कृत्रिम मांग पैदा करने की कोशिश भी की गई।