राज्य में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी पार्टियां अपनी-अपनी ओर से तैयारियों में जुट गयी हैं। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने भी चुनाव करवाने की तैयारियां शुरू कर दी है। इंतजार है तो सिर्फ राज्य में चल रहे मतदाता गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया के पूरा होने और अंतिम मतदाता सूची के जारी होने की। क्योंकि संभावना जतायी जा रही है कि इसके बाद ही राज्य में विधानसभा चुनावों की तारीख घोषित कर दी जाएगी। कितने चरणों में होगा पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव?
पिछली बार के विधानसभा अथवा लोकसभा चुनावों पर अगर गौर किया जाए तो हर बार सर्वाधिक चरणों में पश्चिम बंगाल में ही चुनाव करवाएं गए हैं लेकिन इस बार संभवतः कुछ अलग होने वाला है। मिली जानकारी के अनुसार राज्य का CEO ऑफिस इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मात्र 1 चरण में ही संपन्न करवाने की तैयारियां कर रहा है।
शुक्रवार को राज्य के CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने कुछ ऐसा ही इशारा किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कितने चरणों में होंगे इस बारे में अंतिम निर्णय चुनाव आयोग का ही होने वाला है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि अगर चुनाव आयोग एक चरण में मतदान करवाने पर अपनी मुहर लगा देती है तो कितनी कंपनी केंद्रीय बल को तैनात करना होगा, इस बारे में CEO ऑफिस की तरफ से राष्ट्रीय चुनाव आयोग के सामने अपनी योजनाएं रखी जाएंगी।
गौरतलब है कि पिछले कई चुनावों में हर बार राज्य में सर्वाधिक चरणों में ही चुनाव करवाए गए हैं। यहां तक कि कोरोना काल में भी राज्य में सर्वाधिक चरणों में ही चुनाव आयोग ने चुनाव संपन्न करवाया था। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसे कई राज्यों में कम चरणों में चुनाव करवाया है जहां बंगाल से अधिक विधानसभा केंद्र हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी आरोप लगाया था कि दूसरे राज्यों में महज कुछ चरणों में चुनाव संपन्न हो जाने के बावजूद बंगाल में ऐसा नहीं होता है। संभावना जतायी जा रही है कि वर्तमान में SIR को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका से तृणमूल कांग्रेस असंतुष्ट है। इसलिए बंगाल के विधानसभा चुनाव में कोई पक्षपात अथवा शिकायत का मौका राज्य चुनाव आयोग नहीं देना चाहता है।